आंख बंद करो, रोज़ ये अभ्यास करो… जीवन मस्त हो जाएगा! Shri Premanand Ji Maharaj

Premanand Ji Maharaj: आध्यात्मिक साधना के मार्ग में अगर किसी एक चीज़ को सबसे ऊंचा स्थान दिया गया है, तो वह है एकनिष्ठ भक्ति। Shri Premanand Ji Maharaj के अनुसार, सच्ची भक्ति वही है।
Close your eyes, practice this every day... your life will become wonderful! - Shri Premanand Ji Maharaj
Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest)
Updated on

Glory of Radha Name: आध्यात्मिक साधना के मार्ग में अगर किसी एक चीज़ को सबसे ऊंचा स्थान दिया गया है, तो वह है एकनिष्ठ भक्ति। Shri Premanand Ji Maharaj के अनुसार, सच्ची भक्ति वही है जिसमें साधक का मन, चित्त और जीवन केवल गुरु और श्री श्यामा-श्याम में पूरी तरह समर्पित हो जाए। जैसे एक पतिव्रता स्त्री तीनों लोकों में अपने पति के अलावा किसी और को देखती ही नहीं, वैसे ही उत्तम उपासक के लिए गुरु और प्रभु के सिवा कुछ भी अस्तित्व में नहीं रहता। यही प्रेम की चरम अवस्था है।

नाम की महिमा: भगवान से भी ऊपर 'नाम'

भगवान स्वयं ज्ञान, प्रेम और ऐश्वर्य का महासागर हैं, लेकिन संतों के अनुसार भगवान का नाम उस महासागर का सार है। यही कारण है कि "नाम" को भगवान से भी बड़ा कहा गया है। गुरु कृपा से जब किसी साधक को "राधा राधा" या "राधा वल्लभ श्री हरिवंश" नाम से प्रेम हो जाता है, तो वही उसका साधन, साध्य और पूरा जीवन बन जाता है।

चित्त का दर्पण और नाम की सफाई

जैसे दर्पण पर धूल जम जाए तो प्रतिबिंब नहीं दिखता, वैसे ही हमारे हृदय में विराजमान श्री राधा-कृष्ण सतो, रजो और तमो गुण के कारण ढके रहते हैं। Shri Premanand Ji Maharaj कहते हैं कि चित्त के इस दर्पण को साफ करने की शक्ति केवल गुरु द्वारा दिया गया नाम-स्मरण ही रखता है। जैसे-जैसे नाम जप होता है, भीतर दिव्य प्रकाश प्रकट होने लगता है।

सांसारिक आग बुझाने वाला नाम

यह संसार काम, क्रोध, लोभ और मोह की दावानल से जल रहा है। "नाम" वह अमृत है जो इस आग को तुरंत शांत कर देता है और प्रभु के चरणों की शीतलता प्रदान करता है। मोक्ष चाहने वालों के लिए नाम चंद्रमा के समान है, जिससे हृदय में आनंद का कुमुद खिल उठता है।

पापी से भक्त बनने की अद्भुत लीला

शास्त्रों के अनुसार, जिस क्षण कोई व्यक्ति नाम जप का संकल्प लेता है:

  • चित्रगुप्त तक डर जाते हैं और उसका नाम नरक की सूची से काट देते हैं।
  • ब्रह्मा जी मन ही मन उसे प्रणाम करते हैं, क्योंकि वह आत्मा परम धाम की ओर बढ़ चुकी होती है।
  • नाम हृदय में पड़ते ही पुराने संस्कार भागने लगते हैं, जिससे भीतर थोड़ी हलचल होती है, लेकिन यही शुद्धि का संकेत है।

राधा नाम: सबसे दुर्लभ वरदान

"राधा" नाम वह शक्ति है, जिसका ध्यान शिव, ब्रह्मा और ऋषि-मुनि भी करते हैं। जिनकी जीभ पर "राधा" बस गया, वे फिर संसार के बंधन में नहीं पड़ते और सदा के लिए ब्रजधाम के दिव्य आनंद में निवास करते हैं।

ध्यान दें

Shri Premanand Ji Maharaj कहते हैं, "आंख बंद करो, बाजार छोड़ो और नाम पकड़ लो।" ना धन चाहिए, ना जटिल विधि। बस जीभ पर नाम और हृदय में समर्पण। यही सरल अभ्यास जीवन को अमृतमय और मस्त बना देता है।

Navbharat Live
navbharatlive.com