अली खामेनेई के बेटे मोज्तबा बने ईरान के नए सुप्रीम लीडर, लग गई मुहर, IRGC के दबाव में लिया गया फैसला

Isreal-Iran War: ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोज्तबा को सर्वोच्च नेता चुना गया; उन्हें IRGC का समर्थन और देश की गंभीर आर्थिक-राजनीतिक चुनौतियां हैं।
Mojtaba Ali Khamenei Became New Supreme leader of Iran
अली खामेनेई के बेटे मोज्तबा बने ईरान के नए सुप्रीम लीडर (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Mojtaba Ali Khamenei Became New Supreme leader of Iran: ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोज्तबा अली खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुन लिया गया है। ‘ईरान इंटरनेशनल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वोच्च नेता का चयन करने वाली 80 विद्वानों की समिति ने मोज्तबा के नाम पर मुहर लगा दी है। यह पहली बार है जब ईरान में किसी सर्वोच्च नेता के बेटे को उनका उत्तराधिकारी बनाया गया है।

इजरायल और अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच 56 वर्षीय मोज्तबा को देश की कमान सौंपी गई है। वे अली खामेनेई के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं और लंबे समय से संभावित उत्तराधिकारी माने जा रहे थे। बताया जाता है कि वे अपने पिता के कार्यकाल में पर्दे के पीछे अहम भूमिका निभाते रहे हैं।

मोज्तबा के सामने बड़ी चुनौती?

रिपोर्ट के अनुसार, समिति का मानना है कि मौजूदा संकट की स्थिति में मोज्तबा देश को एकजुट रखने में सक्षम हो सकते हैं। हालांकि उनके सामने बड़ी चुनौती यह होगी कि वे बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक संकट से जूझ रहे ईरान को किस दिशा में ले जाते हैं क्या वे टकराव का रास्ता चुनेंगे या पश्चिमी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की कोशिश करेंगे।

धर्मगुरुओं पर IRGC का दबाव

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है किइस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने धर्मगुरुओं पर मोज्तबा के पक्ष में निर्णय लेने के लिए दबाव डाला था। शिया बहुल ईरान में सुप्रीम लीडर को सरकार और धार्मिक मामलों में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार होता है। मोज्तबा खामेनेई पर अमेरिकी सरकार पहले ही आर्थिक प्रतिबंध लगा चुकी है।

सर्वोच्च नेता देश की सेना और शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर-इन-चीफ भी होते हैं। आईआरजीसी को 2019 में अमेरिका ने एक आतंकवादी संगठन घोषित किया था। अली खामेनेई के कार्यकाल में आईआरजीसी ने राजनीति, सैन्य और आर्थिक क्षेत्रों में अपना प्रभाव काफी बढ़ाया। ईरान लंबे समय से खुद को राजशाही के विकल्प के रूप में पेश करता रहा है। इस्लामिक क्रांति के जरिए मोहम्मद रजा पहलवी के नेतृत्व वाले पहलवी वंश के शासन को हटाया गया था।

ईरान-इराक युद्ध का अनुभव

1969 में मशहद में जन्मे मोज्तबा अली खामेनेई ने धार्मिक शिक्षा प्राप्त की है और उन्हें ‘हुज्जतुल-इस्लाम’ की उपाधि दी गई है। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में भी हिस्सा लिया था। भले ही उन्होंने कोई आधिकारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन उन्हें देश के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में गिना जाता रहा है।

मोज्तबा को अपने पिता की परछाईं के रूप में देखा जाता था। सर्वोच्च नेता के कार्यालय ‘बैत-ए-रहबरी’ के कामकाज में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती थी। साथ ही, रिवोल्यूशनरी गार्ड और बसीज मिलिशिया पर भी उनका परोक्ष प्रभाव बताया जाता रहा है।

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