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यवतमाल में ‘लाडली बहन’ योजना की जांच अंतिम चरण में, 52,000 लाभार्थी संदेह के घेरे में, कल होगा फैसला
महाराष्ट्र में महिलाओं को आर्थिक रुप से सशक्त करने वाली मुख्यमंत्री लाडली बहन योजना को लेकर बड़ा अपडेट आ रहा है। इस योजना का लाभ उठाने वाली महिलाओं की जांच अब आखिरी चरण में है।
- Written By: अपूर्वा नायक

लाडली बहन योजना (सौ. सोशल मीडिया )
Yavatmal News In Hindi: विधानसभा चुनावों से ठीक पहले शुरू की गई लोकप्रिय ‘मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन’ योजना अब एक साल पूरा कर चुकी है, लेकिन अब यह योजना जांच के घेरे में आ गई है।
सरकार ने इस योजना का लाभ उठा रही महिलाओं के नामों का पुनर्सत्यापन शुरू कर दिया है। यवतमाल जिले में लगभग 52,000 महिलाओं के नाम संदेह के घेरे में हैं। इस पुनर्सत्यापन का काम आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से किया जा रहा है और इसकी अंतिम रिपोर्ट गुरुवार को जारी की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि कितनी महिलाएं अपात्र हैं।
धन के दुरुपयोग की शिकायतें और जांच का कारण
‘मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन‘ योजना के तहत हर महीने पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 1,500 रुपये जमा किए जाते हैं। यवतमाल जिले में सात लाख से अधिक महिलाएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं। हालांकि, इस योजना में धन के दुरुपयोग की शिकायतें भी सामने आई हैं। ऐसी खबरें हैं कि इस योजना पर भारी खर्च के कारण कई अन्य सरकारी योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। इन शिकायतों के बाद, महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने अपात्र लाभार्थियों की पहचान करने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत, यवतमाल जिले की 52,110 महिलाओं के नाम संदिग्धों की सूची में शामिल किए गए हैं।
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जांच में आए चौंकाने वाले आंकड़े
जिला परिषद ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों के माध्यम से इन 52,000 से अधिक महिलाओं के नाम की दोबारा जांच का काम शुरू किया है। जिले की 16 तहसीलों में से 80% काम पूरा हो चुका है। शेष 20% काम अगले दो दिनों में पूरा हो जाएगा, जिसके बाद गुरुवार को अपात्र लाभार्थियों के नामों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
अब तक की जांच में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, अकेले यवतमाल जिले में 35,000 से अधिक ऐसे मामले हैं जहां एक ही परिवार से एक से अधिक महिलाएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं। इसके अलावा, 16,365 महिलाएं ऐसी हैं जिनकी उम्र 65 वर्ष से अधिक है, फिर भी वे इस योजना का लाभ ले रही हैं। नियमों के अनुसार, ये दोनों श्रेणियां अपात्र मानी जाती हैं।
सरकारी कर्मचारियों पर भी कार्रवाई
जांच में यह भी सामने आया है कि सरकारी नौकरी में कार्यरत महिलाएं भी नियमों का उल्लंघन करके इस योजना का लाभ ले रही हैं। यवतमाल जिला परिषद में कार्यरत दो महिला कर्मचारियों के नाम भी लाडली बहन योजना की सूची में पाए गए हैं। इन दोनों महिलाओं का लाभ रोका जाएगा और उनसे योजना के तहत प्राप्त की गई राशि की वसूली भी की जाएगी। यह दिखाता है कि सरकार इस मामले में सख्त कार्रवाई करने के मूड में है।
महिला एवं बाल कल्याण विभाग के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल जाधव ने बताया कि अपात्र लाभार्थियों का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है और 20% काम बाकी है। उन्होंने कहा कि यह काम दो दिन में पूरा हो जाएगा और रिपोर्ट अंतिम होगी।
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ये महिलाएं होंगी अपात्र
नियमों के अनुसार, निम्नलिखित महिलाएं ‘लाडली बहन’ योजना के लिए अपात्र मानी जाएंगी:—-
* जिन परिवारों में दो से ज्यादा महिलाएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं, उनमें तीसरी महिला अपात्र होगी।
* 65 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं भी इस योजना के लिए अपात्र हैं।
* जिन महिलाओं के नाम पर कार या अन्य कोई संपत्ति है।
* सरकारी नौकरी में कार्यरत महिलाएं।
इस जांच का उद्देश्य योजना की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, ताकि जरूरतमंद और पात्र महिलाओं को ही इसका लाभ मिल सके। गुरुवार को अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि वास्तव में कितनी महिलाओं को इस योजना का सही तरीके से लाभ मिलेगा।
Ladli behan scheme investigation in yavatmal
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