
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स : सोशल मीडिया )
Government Library Scheme: वर्धा पढ़ोगे तो बढ़ोगे, ऐसा अक्सर कहा जाता है। पढ़ाई की संस्कृति को बनाए रखने के लिए गांव स्तर पर भी ग्रंथालय स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, केंद्र सरकार की ओर शहर में होने वाले पुस्तकालयों को अनुदान भी दिया जाता है, लेकिन जिले के कुछ ग्रंथालयों की स्थिति चिंताजनक हो गई है।
पिछले तीन वर्षों में जिले के 10 ग्रंथालय बंद हो चुके हैं और 8 ग्रंथालय बंद होने की कगार पर हैं। ग्रंथालयों को उनके दर्जे के अनुसार शासन की ओर से अनुदान दिया जाता है। यह अनुदान 4 लाख 40 हजार से लेकर 48 हजार रुपये तक होता है।
मुख्य रूप से इस निधि का उपयोग नई किताबों की खरीद, अखबारों की सदस्यता और अन्य सुविधाओं के लिए किया जाता है। लेकिन कुछ जगहों पर केवल सरकारी अनुदान प्राप्त करने के लिए ग्रंथालय कागजों पर ही दिखाए जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप, जिले में विशेष अभियान चलाकर पुस्तकालयों की जांच करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
जिले में कुल 114 ग्रंथालयों का पंजीयन हुआ था। लगातार तीन साल तक मानक पूरा न करने वाले 10 ग्रंथालयों को बंद कर दिया गया है। इसके अलावा, 8 ग्रंथालयों का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। वर्तमान में जिले में कुल 104 ग्रंथालय होने की जानकारी है।
‘अ’ वर्ग ग्रंथालय 4 से 4.50 लाख रुपये
‘ब’ वर्ग ग्रंथालय: 2.50 से 3 लाख रुपये
‘क’ वर्ग ग्रंथालयः 50 हजार रुपये
‘ड’ वर्ग ग्रंथालय: 48 हजार रुपये
हर वर्ष पुस्तकालयों की जांच एलजीएमएस समिति द्वारा की जाती है। इस जांच में मुख्य रूप से लगातार तीन साल तक मानक पूरा न करने वाले पुस्तकालयों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है, ऐसा भी बताया गया है।
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| तहसील | ग्रंथालयों की संख्या |
|---|---|
| आर्यों | 09 |
| आष्टी | 07 |
| कारंजा (घा.) | 05 |
| देवली | 17 |
| वर्धा | 31 |
| समुद्रपुर | 04 |
| सेलू | 12 |
| हिंगनघाट | 19 |






