6 साल बाद भी अधूरी सौर उपसा सिंचन योजना, निलज बुज के किसान बेहाल; 1.55 करोड़ की योजना कागजों में कैद

Solar Lift Irrigation Project: भंडारा के निलज बुज गांव में 2019 में शुरू की गई सौर ऊर्जा आधारित उपसा सिंचन योजना छह साल बाद भी कागजों में अटकी है, जिससे 100 हेक्टेयर से अधिक भूमि आज भी सिंचाई से वंचित
Six years later, the solar lift irrigation scheme remains incomplete, leaving Nilaj Buj farmers in distress; a 1.55 crore plan remains confined to paperwork
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स : सोशल मीडिया )
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Nilaj Buj Farmers Issue: भंडारा मोहाडी तहसील के निलज बुज गांव में 30 मई 2019 को बड़े तामझाम और राजनीतिक वादों के साथ जिस सौर ऊर्जा आधारित उपसा सिंचन योजना का भूमिपूजन किया गया था, वह योजना आज छह साल बाद भी केवल कागजों में ही सिमटी हुई है।

तत्कालीन विधायक चरण वाघमारे ने इसे किसानों के विकास का मील का पत्थर बताया था, लेकिन हकीकत यह है कि योजना अस्तित्व में आने से पहले ही धूल में मिल गई। परिणामस्वरूप क्षेत्र की 100 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि आज भी सिंचाई से वंचित है।

यह योजना महाराष्ट्र शासन के मृद व जलसंधारण विभाग की ओर से वर्ष 2018 में स्वीकृत की गई थी। 14 अगस्त 2018 के शासन निर्णय के अनुसार इस परियोजना के लिए कुल 1,55,85,713 रुपये की प्रशासकीय मान्यता दी गई थी।

इसमें से 1,41,76,594 रुपये का अनुमानित निर्माण खर्च और 14,09,119 रुपये का अनुषंगिक खर्च शामिल था। इतना सब होने के बावजूद आज तक न तो काम शुरू हुआ और न ही किसी ने जवाबदेही तय की। बीते 6 वर्षों में विधायक राजू कारेमोरे ने 336 करोड़ रुपये की सुरेवाड़ा उपसा सिंचन योजना जरूर मंजूर करवाई, लेकिन निलज बुज की इस सौर ऊर्जा आधारित योजना के लिए उन्होंने भी कोई ठोस पहल नहीं की।

यह सवाल अब किसानों के बीच गंभीर रूप से उठ रहा है कि आखिर यह योजना किसकी लापरवाही की भेंट चढ़ी? इस योजना के तहत वैनगंगा नदी से सौर ऊर्जा पंपों की मदद से पानी उठाकर देव्हाडा क्षेत्र के मानस एग्रो शुगर फैक्ट्री परिसर में स्थित जिला परिषद लघु सिंचाई विभाग के तालाब में छोड़ा जाना था। वहां से नहरों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाने की योजना थी।

प्रशासन-जनप्रतिनिधि की उदासीनता उजागर

यदि यह परियोजना पूरी होती, तो 100 हेक्टेयर से अधिक कोरडवाहू जमीन का सिंचाई संकट हमेशा के लिए समाप्त हो सकता था। लेकिन आज स्थिति यह है कि न तो प्रशासन हरकत में है और न ही जनप्रतिनिधि, भूमिपूजन के समय मंच साझा करने वाले स्थानीय नेता, चुनाव के दौरान बड़े-बड़े दावे करने वाले जनप्रतिनिधि और संबंधित विभाग सब चुप्पी साधे हुए हैं। यह चुप्पी सिर्फ प्रशासनिक उदासीनता नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य के साथ किया गया खुला अन्याय है।

राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव अधिक

निलज बुज और देव्हाडा परिसर के किसानों के लिए यह योजना जीवनदायिनी साबित हो सकती थी। लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव और प्रशासनिक लापरवाही ने इसे जन्म से पहले ही खत्म कर दिया।

किसानों का साफ कहना है कि यदि शासन ने इस योजना को तुरंत शुरू नहीं किया, तो उनका भरोसा पूरी व्यवस्था से उठ जाएगा।

यह योजना सिर्फ एक परियोजना नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य का प्रतिबिंब है, और अब समय आ गया है कि सरकार और जनप्रतिनिधि इस सच्चाई को गंभीरता से समझें।

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