वर्धा में कर्जमुक्ति योजना के निकषों पर किसानों का विरोध, GR की होली जलाकर किया प्रदर्शन

Ahilyadevi Karjmukti Scheme: महाराष्ट्र सरकार की नई कर्जमुक्ति योजना की पेचीदा शर्तों के खिलाफ वर्धा में किसानों और विभिन्न संगठनों ने शासन के जीआर की होली जलाकर तीव्र विरोध प्रदर्शन किया।
Wardha Farmers Debt Relief Demand
वर्धा के किसान कर्ज माफ़ी के लिए प्रदर्शन करते हुए (सोर्स - फोटो नवभारत)
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Wardha Farmers Debt Relief Demand: महाराष्ट्र शासन द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 के बजट में घोषित 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर शेतकरी कर्जमुक्ती योजना 2026' के विभिन्न निकषों का विरोध करते हुए वर्धा जिला शेतकरी कामगार आंदोलन समन्वय समिति ने शासन को ज्ञापन सौंपकर योजना में संशोधन की मांग की है। समिति का आरोप है कि वर्तमान शर्तों के कारण राज्य के लाखों किसान कर्जमाफी के लाभ से वंचित रह जाएंगे।

किसानों के साथ साथ विविध दल व संगठनों के पदाधिकारी, कार्यकर्ता ने एकत्रित आते हुए शासन जीआर की होली जलाई। जोरदार घोषणाएं देते हुए तिव्र विरोध प्रदर्शन किया।ज्ञापन में बताया गया कि सरकार ने 30 सितंबर 2025 तक बकाया फसल ऋण वाले किसानों को दो लाख रुपये तक कर्जमाफी देने तथा नियमित ऋण चुकाने वाले किसानों को 50 हजार रुपये तक प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की है। हालांकि योजना की शर्तें किसानों के हित में नहीं हैं।

समिति ने आरोप लगाया कि दो लाख रुपये से अधिक बकाया ऋण वाले किसानों को पहले अतिरिक्त राशि जमा करने की शर्त रखी गई है, जो आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों के लिए संभव नहीं है। इसी प्रकार वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) की शर्त को भी अन्यायपूर्ण बताया गया है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि वर्ष 2019 से पूर्व कर्जमाफी का लाभ लेने वाले किसानों को नई योजना से बाहर रखा गया है, जबकि पिछले सात वर्षों में अनेक किसान पुनः कर्ज के बोझ तले दब गए हैं।

इसके अलावा ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, वर्धा जिला परिषद सदस्य, नगरसेवक जैसे स्थानीय स्वराज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों को योजना से वंचित करना भी गलत बताया गया है। समिति ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों एवं पेंशनधारक किसान परिवारों को भी योजना का लाभ देने की मांग की है। साथ ही नियमित रूप से ऋण चुकाने वाले किसानों के लिए घोषित प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर अधिक प्रभावी योजना लागू करने की मांग की गई है।

सर्वसमावेशी कर्ज योजना लागू न होने पर होगा आंदोलना

समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने योजना की शर्तों एवं निकषों पर पुनर्विचार कर सभी किसानों के लिए न्यायसंगत एवं सर्वसमावेशी कर्जमाफी योजना लागू नहीं की, तो राज्यभर में लोकतांत्रिक तरीके से तीब आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन की होगी।

आंदोलन में विभिन्न राजनीतिक दलो किसान संगठनों एवं सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी, किसानों के साथ अविनाश काकडे, यशवंत झाडे सुधीर पांगुल, डॉ. अभ्युदय मेघे, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनील कोल्हे, किसान अधिकार अभियान के अध्यक सुदाम पवार, सचिव प्रफुल कुकड़े, भाकपा जिला सचिव द्वारका इमडवार, आरपीआई के महेंद्र मुनेश्वर, आ के मंगेश शेंडे सहित विभिन्न संगठनों के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल थे।

इन पमांगों पर खींचा सरकार का ध्यान

सभी पात्र किसानों को बिना किसी पूर्व शर्त के दो लाख रुपये तक कर्जमाफी दी जाए। दो लाख रुपये से अधिक बकाया ऋण वाले किसानों पर अतिरिक्त राशि जमा करने की शर्त समाप्त की जाए। वर्ष 2019 से पूर्व कर्जमाफी प्राप्त किसानों को भी नई योजना का लाभ दिया जाए, स्थानीय स्वराज संस्थाओं के सदस्य, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एवं पेंशनधारक किसानों को लाभसे वंचित करने वाले नियम रद्द किए जाएं। नियमित ऋण चुकाने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि बढ़ाई जाए।

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