मदरसे में पैदा होते हैं जिहादी! बांग्लादेश में हिंदुओं की हालत पर तसलीमा नसरीन ने जताई चिंता, जमात को लताड़ा

Taslima Nasrin Bangladesh: कोलकाता पहुंचीं तसलीमा नसरीन ने मदरसा शिक्षा, धर्मनिरपेक्षता, कट्टरपंथ और बांग्लादेश की राजनीति पर तीखी टिप्पणियां कीं। उनके बयानों ने एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है।
Taslima Nasrin Madrasa Remarks
तसलीमा नसरीन (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Taslima Nasrin Madrasa Remarks: बांग्लादेश की मशहूर लेखिका तसलीमा नसरीन 19 साल तक निर्वासन में रहने के बाद 31 जुलाई 2026 को बंगाल पहुंची थी। तसलीमा एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंची थी, उन्हें बांग्लादेश की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर बेबाकी से राय रखने के लिए जाना जाता है। इसी बीच उन्होंने एक बार फिर कट्टपंथियों को लेकर विवादित बयान दिया है।

तसलीमा नसरीन ने कहा कि देश में मदरसा शिक्षा की जरूरत नहीं है, क्योंकि कई मामलों में मदरसों से पढ़े लोग जिहादी गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं। उनके मुताबिक कुछ इमामों और मदरसा शिक्षकों को भी कट्टरपंथ से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने दावा किया कि मदरसों से पढ़ने वाले कई छात्र रोजगार हासिल नहीं कर पाते और दान पर निर्भर रहते हैं।

सरकार और धर्म को अलग रखा जरूरी

उन्होंने बांग्लादेश को पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष देश बनाने की मांग करते हुए कहा कि सरकार और धर्म को अलग रखा जाना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि कुछ मस्जिदें कट्टरपंथी गतिविधियों का केंद्र बन गई हैं, इसलिए उन पर सख्त निगरानी जरूरी है। बांग्लादेश की राजनीति पर बोलते हुए तसलीमा नसरीन ने कहा कि देश में कट्टरपंथी संगठनों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

तसलीमा नसरीन ने दावा किया कि जमात-ए-इस्लामी की राजनीति में बढ़ती मौजूदगी चिंता का विषय है। उनके मुताबिक, अवामी लीग मुख्य विपक्षी दल रहती तो स्थिति बेहतर होती। उन्होंने कहा कि तारिक रहमान और मुहम्मद यूनुस के दौर में उन्हें कोई बड़ा फर्क नजर नहीं आता है। नसरीन ने आरोप लगाया कि मुहम्मद यूनुस के शासनकाल में हिंदू समुदाय पर अत्याचार के मामले बढ़े हैं और सरकार दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है।

गैर-मुसलमानों को करना पड़ रहा हिंसा का सामना

उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मदरसों में गैर-मुसलमानों के खिलाफ नफरत की शिक्षा दी जाती है, जिससे हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदाय के लोगों को भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ता है। नसरीन का कहना है कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरत आधुनिक शिक्षा की है। उन्होंने कहा कि ज्यादा मंदिर और मदरसे बनाने के बजाय सरकार को स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए, ताकि सभी नागरिकों को समान अवसर मिल सकें।

इसके साथ ही समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर भी तसलीमा नसरीन ने अपनी पुरानी मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि वह पिछले 40 वर्षों से इसके लिए अभियान चला रही हैं। उनके मुताबिक धर्म आधारित निजी कानून महिलाओं के साथ भेदभाव करते हैं। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश में हिंदू बेटियों को पिता की संपत्ति में बराबर अधिकार नहीं मिलता और कई मामलों में महिलाओं के लिए तलाक लेना भी आसान नहीं है।

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