नवरात्र में ठाणे प्यासा, भातसा डैम में गाद से रुकी सप्लाई, दूषित पानी से बढ़ा खतरा

Thane news: भारी बारिश से भातसा डैम पंपिंग स्टेशन में गाद और कचरा जमा हो गया है, जिसके कारण ठाणे में नवरात्रि के दौरान जल संकट गहरा गया है और दूषित पानी की सप्लाई से स्वास्थ्य खतरा बढ़ गया है।
ठामे मनपा (pic credit; social media)
ठामे मनपा (pic credit; social media)
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Water Crisis in Thane: ठाणे में गणेशोत्सव के बाद अब नवरात्रि पर भी पानी संकट गहराता जा रहा है। लगातार हो रही भारी बारिश ने भातसा डैम क्षेत्र में पानी तो खूब भरा, लेकिन इस बारिश ने शहरवासियों की मुश्किलें भी बढ़ा दीं। ठाणे मनपा के पिसे पंपिंग स्टेशन के नदी तल में गाद, कचरा और पेड़ों की टहनियां इस कदर जमा हो गई हैं कि पूरी क्षमता से पंपिंग करना संभव ही नहीं हो पा रहा है।

यही नहीं, पानी में अत्यधिक गंदगी आने से शुद्धिकरण प्रक्रिया पर भी असर पड़ा है। नतीजा यह कि शहर के घरों तक साफ और पर्याप्त पानी पहुंच ही नहीं रहा। कहीं सप्लाई बेहद कम है तो कहीं गंदा पानी नलों में आ रहा है। डॉक्टरों ने साफ चेतावनी दी है कि यह दूषित पानी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में नागरिकों को सलाह दी गई है कि पानी को उबालकर और छानकर ही इस्तेमाल करें।

मनपा प्रशासन का दावा है कि 30 सितंबर तक जलापूर्ति सामान्य हो जाएगी। नदी जल से गाद और कचरा हटाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है, लेकिन तब तक अपर्याप्त और अनियमित सप्लाई बनी रहेगी। प्रशासन ने नागरिकों से संयम बरतने और पानी का कम से कम उपयोग करने की अपील की है।

इस बीच, शहर में टैंकर माफिया के खिलाफ आक्रोश भी उभर आया है। मनसे ने मनपा पर आरोप लगाया है कि पानी की कमी का फायदा उठाकर टैंकर माफिया सक्रिय हो गए हैं और जनता को लूट रहे हैं। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन किया जाएगा।

नवरात्रि जैसे धार्मिक अवसर पर पानी संकट ने शहर के उत्सव का मजा फीका कर दिया है। जहां एक ओर पंडालों में भक्ति की गूंज है, वहीं दूसरी ओर घर-घर पानी की कमी और दूषित सप्लाई को लेकर गुस्सा है। लोग सवाल कर रहे हैं कि हर साल बारिश के मौसम में गाद और कचरे की वजह से पानी संकट क्यों खड़ा हो जाता है और क्यों प्रशासन समय रहते स्थायी समाधान नहीं करता।

ठाणे जैसे तेजी से बढ़ते शहर में यह पानी संकट न केवल मनपा की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि नागरिकों की सहनशक्ति की भी परीक्षा ले रहा है। अब देखना यह होगा कि मनपा 30 सितंबर तक अपना वादा पूरा कर पाती है या शहरवासियों की प्यास और गुस्सा दोनों और बढ़ेंगे।

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