
कल्याण-डोंबिवली मनपा (सौ. सोशल मीडिया )
Kalyan Dombivli News In Hindi: कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग की चरमराई व्यवस्था का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। अस्पतालों में अव्यवस्था, गैर जिम्मेदाराना प्रबंधन और प्रशासनिक समन्वय की कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
पालिका की स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि लोग मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करने को विवश हो रहे हैं। पालिका के अंतर्गत आने वाले शास्त्रीनगर अस्पताल, रुक्मिणीबाई अस्पताल और 35 से अधिक शहरी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रतिदिन हजारों मरीज निर्भर रहते हैं। लेकिन इन केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, डॉक्टरों की अनियमितता और प्रशासनिक ढिलाई के कारण स्वास्थ्य सेवाएं लगातार कमजोर पड़ती जा रही हैं।
हालत यह है कि मामूली बीमारियों के मरीजों को भी मुंबई और ठाणे के अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है। सबसे गंभीर समस्या आपातकालीन सेवाओं में देखने को मिल रही है।
कई बार गंभीर मरीजों को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाती। हाल ही में एक गर्भवती महिला को अस्पताल में भर्ती करने में हुई लापरवाही के कारण उसे अस्पताल के प्रवेश द्वार पर ही प्रसव करना पड़ा।
इन सभी समस्याओं को देखते हुए सूचना अधिकार कार्यकर्ता मनोज कुलकर्णी ने राज्य शासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ई। रवींद्रन को पत्र लिखकर मांग की है कि कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में शासन सेवा से जुड़े अनुभवी और कर्तव्यनिष्ठ चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी की नियुक्ति की जाए, ताकि स्वास्थ्य विभाग की बिगड़ी व्यवस्था को सुधारा जा सके और नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो।
इस घटना ने पालिका की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के भीतर वित्तीय अनियमितताओं और अनुशासनहीनता के भी कई मामले सामने आए हैं।
श्वान निर्बिजीकरण केंद्र में आर्थिक गड़बड़ी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के कार्यों में अनियमितता, कर्मचारियों द्वारा नियमों का उल्लंघन और रात्रि ड्यूटी में अनुपस्थिति जैसी घटनाओं से विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए है। कुछ डॉक्टरों द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से ऑपरेशन थियेटर का उपयोग करने के मामले भी सामने आए हैं।
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इन अनियमितताओं के चलते पिछले वर्ष पालिका आयुक्त अभिनव गोयल को सख्त कदम उठाने पड़े। एक कर्मचारी को निलंबित किया गया, एक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और एक अन्य कर्मचारी की सेवा समाप्त की गई। लेकिन इन कार्रवाइयों के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।






