ठाणे में आधी रात को गिरी इमारत की दीवार, महिला की मौत, बहू गंभीर रुप से घायल

Thane news: ठाणे के मुंब्रा स्थित लकी कंपाउंड में देर रात इमारत का हिस्सा ढहने से महिला की मौत हो गई। बहू गंभीर रुप से घायल है। इस हादसे ने एक बार फिर 2013 की याद दिलाई है।
ठाणे में गिरी इमारत की दीवार (pic credit; social media)
ठाणे में गिरी इमारत की दीवार (pic credit; social media)
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Thane Building collapse: महाराष्ट्र के ठाणे में सोमवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। मुंब्रा क्षेत्र के दौलतनगर स्थित लकी कंपाउंड की चार मंजिला इमारत का एक हिस्सा अचानक गिर पड़ा। इस मलबे की चपेट में आने से 62 वर्षीय महिला की मौत हो गई, जबकि उसकी बहू गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसा रात 12 बजकर 36 मिनट पर हुआ।

ठाणे महानगरपालिका के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ प्रमुख यासीन तड़वी ने बताया कि मृत महिला का नाम नाहिद जैनुद्दीन जमाली (62) है, जिन्हें अस्पताल ले जाते ही मृत घोषित कर दिया गया। वहीं उनकी बहू इल्मा जेहरा जमाली (26) गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें कलसेकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। दोनों महिलाएं पास ही स्थित सना टावर में रहती थीं और हादसे के वक्त सड़क से गुजर रही थीं।

जानकारी के अनुसार, इस इमारत का निर्माण करीब 25 साल पहले हुआ था। इसे पहले ही ठाणे महानगरपालिका ने ‘सी2बी’ श्रेणी में खतरनाक घोषित कर रखा था, यानी इसमें बड़े पैमाने पर संरचनात्मक मरम्मत की जरूरत थी। हादसे के बाद सुरक्षा कारणों से इमारत पूरी तरह खाली करा दी गई और परिसर को सील कर दिया गया। प्रभावित परिवारों ने रिश्तेदारों के पास शरण ले ली है।

हादसे की जानकारी मिलते ही मुंब्रा वार्ड समिति, अग्निशमन विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं। खतरनाक हिस्से को तुरंत हटाकर क्षेत्र को सुरक्षित किया गया।

लकी कंपाउंड का नाम पहले भी बड़े हादसों से जुड़ा रहा है। अप्रैल 2013 में यहां महाराष्ट्र की सबसे भीषण इमारत ढहने की घटना हुई थी, जिसमें 74 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से अधिक लोग घायल हुए थे। उस हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। अब एक बार फिर यही इलाका हादसे का गवाह बना है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि इलाके की कई पुरानी इमारतें जर्जर हालत में हैं और प्रशासन को समय रहते कदम उठाने चाहिए। लोगों में डर और गुस्सा दोनों नजर आ रहा है।

इस हादसे ने एक बार फिर ठाणे की इमारतों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जर्जर इमारतों की मरम्मत या पुनर्निर्माण में ढिलाई भारी पड़ सकती है और प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे।

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