शरद पवार के साथ बंद कमरे में मीटिंग, अजित पवार के बेटों संग इस मुलाकात पर बढ़ी राजनीतिक हलचल

NCP Merger Latest News: अजित पवार के बेटों, पार्थ और जय पवार ने बारामती में शरद पवार से मुलाकात की। कयास लगाए जा रहे हैं कि यह बैठक एनसीपी विलय और चुनाव रणनीति के लिए थी।
Parth Pawar Sharad Pawar Meeting
Parth Pawar Sharad Pawar Meeting (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
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Parth Pawar Sharad Pawar Meeting: महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र 'बारामती' में बुधवार को उस समय सियासी पारा चढ़ गया, जब दिवंगत नेता अजित पवार के दोनों बेटों,पार्थ पवार और जय पवार ने शरद पवार के निवास स्थान 'गोविंद बाग' के करीब स्थित विद्या प्रतिष्ठान में उनसे मुलाकात की। बंद कमरे में हुई यह बैठक करीब एक घंटे से अधिक समय तक चली। अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद यह पहली बार है जब उनके दोनों बेटों ने अपने दादा (शरद पवार) के साथ अकेले में इतनी लंबी चर्चा की है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी जिला परिषद चुनावों में दोनों गुटों के साथ आने और पवार परिवार की विरासत को एकजुट रखने पर केंद्रित था।

राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं। जहाँ एक ओर सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सत्ता की कमान संभाली है, वहीं दूसरी ओर पार्थ और जय पवार का शरद पवार के पास जाना यह संकेत देता है कि परिवार और पार्टी के स्तर पर 'सुलह' की प्रक्रिया पर्दे के पीछे काफी तेज हो चुकी है।

जिला परिषद चुनावों में गठबंधन की रणनीति

सूत्रों का दावा है कि इस बैठक में मुख्य रूप से 5 फरवरी और उसके बाद होने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों पर चर्चा हुई। हाल ही में पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में दोनों एनसीपी गुटों ने 'एक परिवार' के तौर पर मिलकर चुनाव लड़ा था। अब अजित पवार के बेटों की कोशिश है कि ग्रामीण इलाकों में भी पार्टी के वोट बैंक को बंटने से रोका जाए। शरद पवार ने भी हाल ही में संकेत दिए थे कि वे परिवार को एकजुट रखने और कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए तैयार हैं।

पार्थ पवार की नई भूमिका और राज्यसभा की चर्चा

इस बैठक के बाद पार्थ पवार की राजनीतिक भूमिका को लेकर भी अटकलें तेज हैं। चर्चा है कि सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने और उनके द्वारा खाली की जाने वाली राज्यसभा सीट पर पार्थ पवार को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। पार्थ ने पिछले कुछ दिनों में शरद पवार और सुप्रिया सुले के साथ अपनी नजदीकी बढ़ाई है। जानकारों का मानना है कि पार्थ पवार इस समय दोनों गुटों के बीच एक 'सेतु' (Bridge) का काम कर रहे हैं, ताकि अजित दादा का अधूरा सपना, एनसीपी का विलय, पूरा किया जा सके।

विलय की ओर बढ़ते कदम?

शरद पवार ने हाल ही में खुलासा किया था कि अजित पवार 12 फरवरी को विलय की घोषणा करने वाले थे। अब पार्थ और जय पवार की इस सक्रियता को उसी दिशा में बढ़ता हुआ कदम माना जा रहा है। हालांकि, छगन भुजबल और सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेता वर्तमान में बीजेपी के साथ गठबंधन को प्राथमिकता दे रहे हैं, लेकिन पवार परिवार के युवा सदस्यों का झुकाव अपने दादा के मार्गदर्शन में काम करने की ओर दिख रहा है। यदि जिला परिषद चुनावों में यह प्रयोग सफल रहता है, तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

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