धर्मवीर आनंद दिघे की 75वीं जयंती: डिप्टी सीएम शिंदे ने दी अपने गुरु को श्रद्धांजलि, शक्तिस्थल पर उमड़ा जनसैलाब

Anand Dighe Birth Anniversary: ठाणे के 'धर्मवीर' स्वर्गीय आनंद दिघे की 75वीं जयंती पर शक्तिस्थल को भव्य रूप से सजाया गया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उन्हें याद कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
Anand Dighe Birth Anniversary Eknath Shinde Paid Tribute
धर्मवीर आनंद दिघे को श्रद्धांजलि अर्पित करते डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Eknath Shinde Paid Tribute To Anand Dighe: महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता और ठाणे के रक्षक माने जाने वाले स्वर्गीय आनंद दिघे की 75वीं जयंती आज पूरे राज्य में गौरव के साथ मनाई जा रही है। ठाणे के 'शक्तिस्थल' पर सुबह से ही उनके समर्थकों और राजनीतिक दिग्गजों का तांता लगा हुआ है, जो अपने प्रिय नेता की विरासत को नमन कर रहे हैं।

ठाणे के शक्तिस्थल को फूलों से बेहद खूबसूरती के साथ सजाया गया है। इस विशेष अवसर पर ठाणे नगर निगम ने कई कार्यक्रमों का आयोजन किया है, जिसमें शक्तिस्थल के पास आयोजित भजन प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण है। आनंद दिघे की जन-सेवा की परंपरा को जारी रखते हुए, आज ठाणे में महिला चालकों द्वारा संचालित 75 ऑटो रिक्शा नागरिकों के लिए मुफ्त उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त, दिघे साहब की पुरानी 'आर्माडा' गाड़ी को भी स्मारक स्थल पर रखा गया है, जो कार्यकर्ताओं और नागरिकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

'धर्मवीर' से 'बाहुबली' तक: एक जननायक का अद्वितीय सफर

27 जनवरी 1951 को जन्मे आनंद दिघे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि ठाणे के लोगों के लिए एक मसीहा थे। एक साधारण मराठी परिवार में जन्मे दिघे साहब के व्यक्तित्व पर उनके पिता चिंतामणि दिघे और उनके खेती-किसानी वाले पारिवारिक परिवेश का गहरा प्रभाव था। बालासाहेब ठाकरे के ओजस्वी भाषणों से प्रेरित होकर वह अपने किशोरावस्था के उत्तरार्ध में एक कार्यकर्ता के रूप में शिवसेना में शामिल हुए। उनकी अटूट निष्ठा और अनुशासन के कारण वे 1984 में ठाणे के जिला प्रमुख बने। निडर और प्रभावशाली नेतृत्व के कारण उन्हें अक्सर ठाणे का 'बाहुबली' भी कहा जाता था।

टेंभी नाका का वो मशहूर 'दरबार' और मराठी अस्मिता की लड़ाई

आनंद दिघे का टेंभी नाका स्थित आवास नागरिकों की शिकायतों के निवारण का केंद्र बन गया था। उनके दैनिक 'दरबार' में वे खुद लोगों की समस्याओं को सुनते थे और मौके पर ही न्याय सुनिश्चित करते थे। उन्होंने न केवल राजनीति बल्कि सामाजिक क्षेत्रों में भी बड़ा योगदान दिया। उन्होंने मराठी उद्यमियों को प्रोत्साहित किया, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं की मदद की और हाजी मलंग गढ़ का नाम बदलकर 'श्री मलंग गढ़' करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।, गणेश चतुर्थी और नवरात्रि जैसे उत्सवों को लोकप्रिय बनाने में भी उनका योगदान सदैव याद किया जाता है।

एकनाथ शिंदे के मार्गदर्शक और उनका दुखद अंत

वर्तमान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के राजनीतिक जीवन को आकार देने में आनंद दिघे की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। दिघे साहब ने ही शिंदे को राजनीति के गुण सिखाए और उनके मार्गदर्शक बने। हालांकि, 24 अगस्त 2001 को एक सड़क दुर्घटना के बाद 26 अगस्त को दिल का दौरा पड़ने से उनका आकस्मिक निधन हो गया, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया जिसे आज तक भरा नहीं जा सका है।, आज भी ठाणे के 'मराठी मानुस' के दिलों में उनकी यादें उतनी ही ताजा हैं।

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