500 साल पुराने सिक्के, शिवाजी महाराज की स्वर्ण मुद्राएं… Pune में इतिहास होगा LIVE

Pune में ‘कॉइनेक्स पुणे 2025’ के जरिए दुर्लभ और ऐतिहासिक सिक्कों का भव्य दीदार मिलेगा। शिवकालीन स्वर्ण ‘होन’ सहित देश-विदेश के अनोखे सिक्के 19 से 21 दिसंबर तक सोनल हॉल में प्रदर्शित होंगे।
Pune Water Crisis Ambegaon Junnar Tanker
पुणे वॉटर क्राइसिस टैंकर सप्लाई (सौ. फाइल फोटो )
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Pune News In Hindi: इतिहास को करीब से देखने और समझने का अवसर अब पुणेकरों को सिक्कों के माध्यम से मिलने जा रहा है। प्राचीन और दुर्लभमुद्राओं के भव्य संग्रह के साथ 'कॉइनेक्स पुणे 2025' का आयोजन शुक्रवार (19 दिसंबर) से किया जा रहा है।

यह तीन दिवसीय प्रदर्शनी रविवार (21 दिसंबर) तक कर्वे रोड स्थित सोनल हॉल में आयोजित होगी, जो प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक आम जनता के लिए निःशुल्क खुली रहेगी। इंटरनेशनल कलेक्टर्स सोसाइटी ऑफ रेयर आइटम्स (आईसीएसआरआई) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में भारतीय इतिहास की समृद्ध परंपरा को दर्शाने वाली दुर्लभमुद्राओं का अनोखा संग्रह प्रस्तुत किया जाएगा।

आयोजन की जानकारी देते हुए संस्था के पुणे सचिव शरद बोरा ने बताया कि इस वर्ष प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण छत्रपती शिवाजी महाराज के काल की स्वर्ण 'होन' मुद्राएं होंगी, जिन्हें बहुत कम लोग प्रत्यक्ष देख पाए हैं। इस अवसर पर उपाध्यक्ष कमलेश मोतीवाला, सह-सचिव श्याम मोटे, कोषाध्यक्ष नितिन शाह और राजेंद्र शाह भी उपस्थित थे।

विभिन्न देशों के फैंसी सिक्के भी देख सकेंगे

प्रदर्शनी में प्राचीन भारत के साथ-साथ आधुनिक भारत के दुर्लभ सिक्के और नोट भी प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त विभिन्न देशों के ऐतिहासिक और 'फैंसी' विदेशी सिक्के भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगे। बोरा ने कहा कि सिक्के केवल लेन-देन का साधन नहीं, बल्कि अपने समय के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास के साक्ष्य होते हैं।

हस्तियों का होगा सम्मान

शुक्रवार सुबह 10 बजे प्रसिद्ध मुद्राशास्त्र विशेषज्ञ डॉ. के. के. माहेश्वरी के हाथों प्रदर्शनी का उ‌द्घाटन होगा। इस अवसर पर मुद्राशास्त्र और इतिहास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा. दिवंगत इतिहासकार गजानन मेहेंदले को मरणोपरांत 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड' प्रदान किया जाएगा, जबकि फारुख एस. तोडीवाला, डॉ. दिलीप राजगोर और पोपट हलपावत को भी इस सम्मान से नवाजा जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में प्रदर्शनी के साथ संवाद सत्र और शैक्षणिक कार्यक्रम भी होंगे, जिनका उद्देश्य नई पीढ़ी में इतिहास और संग्रह की रुचि विकसित करना है।

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