
पिपरी-चिंचवड मनपा (सौ. सोशल मीडिया )
Pimpri Chinchwad MNC Tax Survey : पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका के कर वसूली विभाग द्वारा कराए गए संपत्ति कर सर्वेक्षण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
इस पूरे प्रकरण की आयुक्त श्रवण हर्डीकर द्वारा गठित विशेष समिति के माध्यम से गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सर्वेक्षण प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर गंभीर गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं। जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट आगामी बजट सत्र के दौरान राज्य के नगर विकास विभाग को सौंपी जाएगी।
मनपा के कर वसूली विभाग द्वारा कराए गए इस सर्वेक्षण में नागरिकों पर नियमों के विरुद्ध गलत तरीके से संपत्ति कर लगाए जाने, अतिरिक्त कर वसूली और नियमबाह्य बिल जारी किए जाने के आरोप हैं। यह सर्वेक्षण ‘स्थापत्य कंसल्टेंसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ नामक ठेकेदार कंपनी को सौंपा गया था।
नागपुर में हुए शीतकालीन अधिवेशन के दौरान विधायक अमित गोरखे ने विधान परिषद में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से इस सर्वेक्षण का स्वतंत्र समिति से ऑडिट कराने और संबंधित कंपनी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
उद्योग मंत्री ने दिया था आश्वासन इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्योग मंत्री उदय सामंत ने सदन में कहा कि कर वसूली सर्वेक्षण से जुड़े पूरे मामले की विस्तृत जांच की जाएगी।
इसके लिए आयुक्त को विशेष जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक संबंधित कंपनी को शेष भुगतान नहीं किया जाएगा। विधायक अमित गोरखे ने कहा कि शहर की सभी संपत्तियों को कर के दायरे में लाने के उद्देश्य से इस कंपनी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
विधायक गोरखे ने ड्रोन सर्वेक्षण में वास्तविक कार्य, बिलों की जांच, तकनीकी रिपोर्ट, नियमों के उल्लंघन और मनपा को हुए आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए, साथ ही 3 लाख 70 हजार से अधिक संपत्तियों से कर वसूली न होने से हुए राजस्व नुकसान पर भी जवाब मांगा।
पालिका के कर महानगर वसूली विभाग के सर्वेक्षण की जांच के लिए समिति गठित कर कार्रवाई की जा रही है। संपूर्ण जांच रिपोर्ट शीघ्र ही शासन को सौंपी जाएगी।
– श्रवण हर्डीकर, आयुक्त, पिपरी-चिंचवड मनपा
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सर्वेक्षण के तहत मनपा क्षेत्र में घर-घर जाकर सर्वे किया गया, साथ ही ड्रोन तकनीक का भी उपयोग किया गया। इसमें नई संपत्ति संख्या देना, नया कर निर्धारण, पुनः कर निर्धारण, स्व-मूल्यांकन, संपत्ति पंजीकरण, छूट योजनाओं का समावेश, संपत्ति हस्तांतरण और संपत्ति कर उतारा जैसे कार्य शामिल थे।






