
अजित पवार का कौन सा सपना अधूरा रह गया, फोटो- सोशल मीडिया
Ajit Pawar Death: अजित पवार, एक ऐसा नाम जो दशकों तक महाराष्ट्र की सत्ता के केंद्र में रहा। 6 बार राज्य के उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले अजित पवार का बारामती में एक विमान हादसे में दुखद निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति का एक ऐसा अध्याय समाप्त हो गया, जिसने हमेशा सत्ता के शिखर यानी मुख्यमंत्री पद को छूने की अदृश्य ख्वाहिश पाले रखी थी।
अजित पवार के राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि वे 6 बार डिप्टी सीएम बने, लेकिन कभी मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाए। उन्होंने पहली बार 2010 में पृथ्वीराज चव्हाण की सरकार में डिप्टी सीएम का पद संभाला था। इसके बाद 2012, 2019 (दो बार), 2022, 2023 और हाल ही में 5 दिसंबर 2024 को उन्होंने छठी बार इस पद की शपथ ली थी।
प्रशासनिक दक्षता के मामले में उन्हें ‘दादा’ माना जाता था। उन्होंने वित्त, राजस्व, ऊर्जा और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को अपनी उंगलियों पर चलाया। लेकिन राजनीतिक गलियारों में हमेशा यह चर्चा रही कि 6 बार ‘नंबर दो’ की कुर्सी पर बैठने वाले अजित पवार की असली ख्वाहिश ‘नंबर एक’ यानी राज्य का नेतृत्व करने की थी।
अजित पवार का पूरा राजनीतिक जीवन अपने चाचा शरद पवार की छाया में शुरू हुआ, लेकिन उनकी असली लड़ाई अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की थी। 2019 में जब उन्होंने पहली बार देवेंद्र फडणवीस के साथ मिलकर सुबह-सुबह शपथ ली, तो वह उनकी इसी महत्वाकांक्षा और बगावत का पहला बड़ा संकेत था।
2023 में उन्होंने एक बार फिर चाचा के खिलाफ विद्रोह किया और एनसीपी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा ठोक दिया। यह केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि यह साबित करने के लिए था कि वे अपने दम पर महाराष्ट्र की राजनीति का नेतृत्व कर सकते हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में जब उनकी पार्टी ने 41 सीटें जीतीं, तो उन्होंने दुनिया को दिखा दिया कि वह शरद पवार की विरासत से इतर अपनी खुद की जमीन तैयार कर चुके हैं।
अजित पवार की सबसे बड़ी ताकत हमेशा से ‘बारामती’ रहा है। ग्रामीण विकास और किसानों के मुद्दों की जमीनी समझ रखने वाले पवार के लिए बारामती केवल एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं, बल्कि उनका घर था। यह नियति का क्रूर खेल ही है कि जिस बारामती को उन्होंने संवारा, उसी की धरती पर उनका विमान क्रैश हो गया। बुधवार सुबह करीब 9 बजे, मुंबई से उड़ान भरने के ठीक एक घंटे बाद, उनका प्लेन बारामती एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हो गया। इस दुर्घटना में उनके साथ दो पायलट और दो अन्य यात्रियों की भी मौत हो गई। वे स्थानीय रैलियों को संबोधित करने जा रहे थे, लेकिन जनता के बीच पहुँचने से पहले ही मौत ने उन्हें गले लगा लिया।
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अजित पवार ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे- लोकसभा चुनाव में झटका लगा तो विधानसभा में शानदार वापसी की। वे एक ऐसे मराठा नेता थे जो कभी सत्ता से बाहर नहीं रहे, लेकिन सत्ता के सर्वोच्च शिखर की उनकी वो ‘ख्वाहिश’ हमेशा के लिए अधूरी रह गई। महाराष्ट्र उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में याद रखेगा जो प्रशासन का मास्टर था, जो बगावत करने का साहस रखता था और जिसने अंतिम सांस तक अपनी शर्तों पर राजनीति की।






