पुणे में भाजपा के 'ऑपरेशन लोटस' को लगा बड़ा झटका; पंचायत समिति चुनावों में चित हुए 'दिग्गज मोहरे'

BJP Operation Lotus Pune Failure: पुणे पंचायत समिति चुनाव में भाजपा का ऑपरेशन लोटस फेल। संग्राम थोपटे और संजय जगताप जैसे नेता पहली परीक्षा में हारे, 10 सीटों पर NCP की जीत।
BJP Operation Lotus Pune Failure
BJP Operation Lotus Pune Failure (फोटो क्रेडिट-X)
Published on
Updated on

Sangram Thopte BJP News: महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन लोटस' के जरिए विपक्षी किलों को ढहाने की भाजपा की रणनीति को तगड़ा झटका लगा है। विशेष रूप से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के गढ़ माने जाने वाले पुणे जिले और बारामती लोकसभा क्षेत्र में भाजपा का गणित बिगड़ता नजर आ रहा है। आगामी 2029 के आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने पिछले एक साल में कांग्रेस और अन्य दलों के कई कद्दावर नेताओं को अपने पाले में शामिल किया था। इसमें भोर-राजगढ़ से संग्राम थोपटे, पुरंदर से संजय जगताप और इंदापुर से प्रवीण माने जैसे बड़े नाम शामिल थे।

भाजपा का मानना था कि इन 'दिग्गज मोहरों' के आने से पुणे जिले में शरद पवार और उनके परिवार का दबदबा कम होगा। हालांकि, हाल ही में संपन्न हुए पुणे जिला पंचायत समिति के सभापति और उपसभापति चुनावों के नतीजों ने भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जिले की 13 पंचायत समितियों में से 10 पर एनसीपी ने अपना परचम लहराया है, जबकि भाजपा केवल एक सीट (दौंड) पर ही सिमट कर रह गई है।

दिग्गज नेताओं का नहीं चला जादू

भाजपा ने भोर, मुळशी और राजगढ़ के किलों को फतह करने के लिए संग्राम थोपटे पर बड़ा दांव लगाया था। थोपटे के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने से पार्टी को बड़ी जीत की उम्मीद थी, लेकिन पंचायत समिति चुनावों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने उन्हें मात दे दी है। भले ही थोपटे ने भोर में भाजपा का खाता खोलते हुए चार सीटें जिताई हों, लेकिन सत्ता हासिल करने में वे नाकाम रहे। यही हाल पुरंदर में संजय जगताप का रहा, जहां वे अपनी ही पंचायत समिति को बचाने में असफल साबित हुए।

बारामती फतह की राह हुई कठिन

भाजपा का मुख्य लक्ष्य बारामती लोकसभा क्षेत्र में सेंध लगाना है। इसके लिए प्रवीण माने जैसे नेताओं को इंदापुर से पार्टी में लाया गया था। लेकिन, इस 'पहली परीक्षा' यानी पंचायत समिति और जिला परिषद के शुरुआती रुझानों में ये नेता अपना करिश्मा नहीं दिखा पाए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल बड़े नेताओं को शामिल करने से जमीनी स्तर पर वोट बैंक शिफ्ट नहीं हो रहा है। ग्रामीण इलाकों में अब भी एनसीपी की पकड़ भाजपा के 'ऑपरेशन लोटस' से कहीं ज्यादा मजबूत दिखाई दे रही है।

विपक्ष की एकजुटता और भाजपा की चुनौती

इन नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पुणे जिले में भाजपा का अस्तित्व तो बढ़ा है, लेकिन वह अभी भी सत्ता पलटने की स्थिति में नहीं है। संजय जगताप और संग्राम थोपटे जैसे नेताओं के माध्यम से भाजपा ने कुछ सीटों पर जीत दर्ज कर अपना खाता जरूर खोला है, लेकिन इसे 'विजयी शुरुआत' नहीं माना जा सकता। आगामी विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना होगा, क्योंकि जिन मोहरों के दम पर वह बारामती जीतने का सपना देख रही थी, वे पहली ही परीक्षा में फेल नजर आ रहे हैं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com