
Kumbh Mela Authorit (सोर्सः सोशल मीडिया)
Simhastha Kumbh Nashik: नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित विभाग इसे एक अवसर मानकर पूरी जिम्मेदारी से कार्य करें। कुंभ मेले के लिए जारी विकास कार्य उच्च गुणवत्ता के होने चाहिए और उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए प्रत्येक एजेंसी को “एक्शन मोड” में काम करना होगा। ये स्पष्ट निर्देश राज्य के जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने दिए।
वे आज नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण द्वारा आयोजित “गुणवत्ता नियंत्रण प्रनासिक्षण कार्यशाला” में बोल रहे थे। इस अवसर पर कुंभ मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं विभागीय आयुक्त प्रवीण गेडाम, कुंभ मेला आयुक्त शेखर सिंह, नासिक नगर निगम आयुक्त मनीषा खत्री सहित विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
प्रयागराज कुंभ के अनुभव का हवाला देते हुए मंत्री महाजन ने कहा कि नासिक के रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर क्षेत्रों में स्थान सीमित है, जबकि श्रद्धालुओं की संख्या चार से पांच गुना तक बढ़ने की संभावना है। इसलिए भीड़ प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं का अनुशासित व वैज्ञानिक नियोजन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने पर्याप्त निधि उपलब्ध कराई है और किसी भी प्रकार का दुरुपयोग या अपव्यय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मंत्री ने चेतावनी दी कि सड़कों, कंक्रीटीकरण, गोदावरी स्वच्छता और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े कार्यों में यदि किसी भी प्रकार की तकनीकी त्रुटि पाई गई, तो संबंधित एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अस्थायी असुविधा हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वैश्विक स्तर पर नानासिक की छवि उज्ज्वल बने, इसी दृष्टिकोण से सभी कार्य किए जाएं।
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कार्यशाला के दौरान विभागीय आयुक्त प्रवीण गेडाम ने कहा कि गुणवत्ता नियंत्रण विकास नियोजन का अभिन्न हिस्सा है। कुंभ मेला आयुक्त शेखर सिंह ने नानासिक की वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए इंजीनियरिंग डिज़ाइन और निर्माण सामग्री के चयन पर विशेष जोर दिया। प्रनासिक्षण सत्र में आईआईटी मुंबई के डॉ. धर्मवीर सिंह ने बिटुमिनस और कंक्रीट सड़कों के तकनीकी मानकों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
इसके अलावा, विकास ठाकरे ने जल निकासी और शहरी बुनियादी ढांचे के समन्वय पर जानकारी दी। अविनाश आठवले और वैभव भोंसले ने आईएसओ मानकों के अनुसार निरीक्षण प्रक्रिया का प्रस्तुतीकरण किया। देवलाली छावनी परिषद के पीयूष पाटिल ने विभिन्न अनापत्ति प्रमाण पत्रों (NOC) की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। इस कार्यशाला में विभिन्न सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता और गुणवत्ता नियंत्रण संस्थानों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।






