चैत्र नवरात्रि के दौरान पीरियड्स आ जाए तो क्या करें? यहां जानिए। माता रानी की कृपा पाने का उपाय

Chaitra Navratri puja :चैत्र नवरात्रि के दौरान यदि पीरियड्स आ जाएं तो घबराने की जरूरत नहीं है। श्रद्धा और आस्था मन से होती है, इसलिए इस समय भी माता रानी का ध्यान, मंत्र जप और भक्ति जारी रख सकते हैं।
Chaitra Navratri Period Rules
नवरात्रि में पीरियड्स के नियम (सौ.AI)
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Periods Me Navratri Vrat Kare Ya Nahi : आज 19 मार्च से आस्था, भक्ति और शक्ति की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। पूरे नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। हर दिन देवी के एक विशेष रूप को समर्पित होता है और उसी के अनुसार भक्त पूजा-अर्चना करेंगे।

हिन्दू लोक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा की आराधना के लिए बेहद पवित्र माने जाते हैं। इस दौरान भक्त उपवास रखते हैं और विशेष पूजा-पाठ करते हैं। खासतौर पर महिलाएं इस व्रत को बड़े उत्साह से करती हैं।

महिलाएं पड़ जाती हैं दुविधा में

लेकिन कई बार ऐसा होता है कि नवरात्रि के बीच में ही महिलाओं को मासिक धर्म आ जाता है। ऐसे में उनके मन में यह दुविधा रहती है कि पूजा और व्रत को कैसे निभाया जाए। तो आपको बता दें कि शास्त्रों में इस स्थिति से जुड़े कुछ खास नियम बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर महिलाएं अपनी भक्ति पूरी निष्ठा से कर सकती हैं। तो चलिए जानते हैं इन नियमों के बारे में…

क्या कहती हैं मान्यताएं?

लोक मान्यतायों के अनुसार, पीरियड्स के दौरान माँ की पूजा करना अपवित्र और अशुद्ध माना जाता है। इतना ही नहीं इसमें पूजा स्थल से दूर रहने की सलाह भी दी जाती है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि पीरियड्स के दौरान निकलने वाला खून, गंदा खून होता है। वहीं, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इन सभी बातों को अशुद्ध नहीं मानते हैं और पूजा-पाठ को भाव और श्रद्धा से जोड़ते हैं न कि शारीरिक अवस्था से।

नवरात्रि में पीरियड्स के दौरान मुख्य नियम

  • व्रत जारी रखें

यदि आप शारीरिक रूप से सक्षम महसूस कर रही हैं, तो व्रत जारी रखें।

  • पूजा-पाठ

इस दौरान मूर्ति, पूजा की सामग्री, या मंदिर की सफाई न करें और न ही छुएं।

  • मानसिक पूजा

आप मन ही मन माता रानी का स्मरण, दुर्गा सप्तशती का पाठ बिना पुस्तक छुए या मंत्रों का जाप कर सकती हैं।

  • पूजा की व्यवस्था

घर के अन्य सदस्यों से पूजा करवाएं, या आप स्वयं कर रही हैं तो दूर बैठकर मानसिक रूप से करें।

  • सेहत का ध्यान

अगर पीरियड्स के कारण कमजोरी, दर्द या अत्यधिक अस्वस्थता हो, तो व्रत छोड़ देना ही बेहतर है। भगवान प्रेम के भूखे होते हैं, नियम के नहीं।

  • चौथे दिन के बाद

आमतौर पर चौथे या पांचवें दिन ब्लीडिंग रुकने के बाद, स्नान कर शुद्ध होकर आप फिर से पूजा-पाठ शुरू कर सकती हैं।

श्रद्धा और साफ-सफाई सबसे महत्वपूर्ण है। आप मानसिक रूप से व्रत का पालन कर सकती हैं, बस शारीरिक पूजा के नियमों का ध्यान रखें।

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