
Prakash Londhe:नासिक महानगरपालिका चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Municipal Corporation Election: नासिक महानगरपालिका चुनाव के बीच रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले गुट) के पूर्व पार्षद प्रकाश मुगल लोंढे की उम्मीदवारी शहर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
न्यायिक हिरासत में होने के बावजूद, अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करते हुए लोंढे ने जेल से ही चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। नासिक के राजनीतिक इतिहास में इसे एक महत्वपूर्ण और दुर्लभ घटना माना जा रहा है।
प्रकाश लोंढे प्रभाग संख्या 11 ‘ड’ (सामान्य वर्ग) से आरपीआई (अठावले गुट) के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरे हैं। उनकी इस उम्मीदवारी ने सातपूर क्षेत्र के चुनावी माहौल को और अधिक गरमा दिया है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, यह मामला इस तथ्य को पुनः रेखांकित करता है कि जब तक किसी व्यक्ति को दोषी सिद्ध नहीं किया जाता, तब तक न्यायिक हिरासत में रहते हुए भी उसे चुनाव लड़ने का कानूनी अधिकार प्राप्त है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेल से चुनाव लड़ने की अनुमति किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका की संतुलित भूमिका और लोकतांत्रिक अधिकारों की व्यापकता को दर्शाती है।
विधिज्ञ यतीश देसले ने इस संदर्भ में कहा “भारतीय संविधान के अनुसार किसी भी व्यक्ति को दोष सिद्ध होने तक निर्दोष माना जाता है। न्यायालय द्वारा प्रकाश लोंढे के अधिकार को मान्यता देना लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती देता है। प्रतिनिधि के माध्यम से नामांकन दाखिल करना पूरी तरह से एक वैध कानूनी प्रक्रिया है।”
प्रचार की चुनौती: जेल से चुनाव लड़ने का अधिकार होने के बावजूद, व्यक्तिगत प्रचार या जेल से बाहर आने के लिए न्यायालय से अलग अनुमति आवश्यक होती है।
पार्टी नेतृत्व: प्रकाश लोंढे केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के नेतृत्व वाली आरपीआई (अठावले गुट) के उम्मीदवार हैं।
प्रतिनिधि की भूमिका: उन्होंने अपना नामांकन पत्र अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से दाखिल किया है।
नासिक महानगरपालिका चुनाव में प्रभाग 11 ‘ड’ की यह चुनावी जंग अब कानूनी पहलुओं और लोकतांत्रिक चर्चाओं के कारण एक नए संदर्भ में देखी जा रही है।






