नासिक मनपा में मराठी भाषा अनुपालन पर सख्त ऑडिट, दस्तावेज़ों से वेबसाइट तक 50 सवालों से जांच

Nashik Marathi Language Audit: नासिक मनपा में मराठी भाषा उपयोग की जांच के लिए विशेष टीम पहुंची है। दस्तावेज, वेबसाइट और कार्यालयीन कार्यप्रणाली का विस्तृत ऑडिट किया जा रहा है।
Nashik Municipal Corporation conducts strict audit on Marathi language compliance, with 50 questions covering everything from documents to website
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Nashik Municipal Corporation: नासिक महानगरपालिका (एनएमसी) के प्रशासनिक कार्यों में मराठी भाषा का उपयोग पूरी तरह से हो रहा है या नहीं, इसकी जांच के लिए मराठी भाषा संचालनालय की एक विशेष टीम पिछले दो दिनों से मनपा मुख्यालय में डेरा डाले हुए है।

यह के टीम विभाग दस्तावेजों, अधिकारियों के हस्ताक्षरों और कार्यालयीन मुहरों की विस्तृत जांच कर रही है। जांच की प्रक्रिया को पारदर्शी और विस्तृत बनाने के लिए टीम कई पहलुओं पर काम कर रही है।

टीम के पास लगभग 50 प्रश्नों की एक प्रश्नावली है। इसके अलावा वेबसाइट कंप्यूटर प्रणाली और आवक-जावक रजिस्टर सहित 22 विभिन्न बिंदुओं पर डेटा एकत्र किया जा रहा है।

कार्यालयीन पट्टिकाएं, पदनाम, अधिकारियों की टिप्पणियां और पत्राचार की भाषा को बारीकी से परखा जा रहा है। हालांकि कुछ लोग इसे चुनाव के बाद की कार्रवाई से जोड़ रहे हैं, लेकिन संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि यह राज्यव्यापी नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

निरीक्षण के मुख्य क्षेत्र

दस्तावेजः आवक-जावक रजिस्टर, सेवा पुस्तिकाएं और टिप्पणियां। डिजिटलः वेबसाइट और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की भाषा। डिस्प्लेः नेमप्लेट, पदनाम पट्टिकाएं और सूचना। योग्यता: कर्मचारियों की शैक्षणिक मार्कशीट और भाषा दक्षता।

नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई

जांच के दौरान एक बौकाने वाला तथ्य सामने आया है। संचालनालय के निदेशक अरुण गिते ने बताया कि महापालिका के सभी कर्मचारियों की दसवीं कक्षा की मार्कशीट जांची गई, जिसमें दो कर्मचारियों की मार्कशीट में प्रथम भाषा के रूप में मराठी दर्ज नहीं पाई गई।

नियमों के अनुसार, ऐसे कर्मचारियों को अब भाषा संचालनालय द्वारा आयोजित विशेष परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी, जब तक वे यह परीक्षा पास नहीं कर लेते, तब तक उनकी पदोन्नति और वार्षिक बेतनवृद्धि पर रोक लगा दी जाएगी।

क्यों जरूरी है यह जांच ?

  • निदेशक अरुण गिते के अनुसार, महाराष्ट्र राज्य की स्थापना भाषाई आधार पर हुई थी। वर्ष 1964 में कानून बनाकर प्रशासनिक कामकाज मराठी में करना अनिवार्य किया गया था।
  • उच्च न्यायालयों और केंद्र सरकार के साथ पत्राचार जैसे अपवादों को छोड़कर अन्य सभी स्थानीय कामकाज केवल मराठी में ही होने चाहिए।
  • इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए हर जिले में समितियां गठित की गई है और प्रत्येक शासकीय कार्यालय में मराठी भाषा अधिकारी की नियुक्ति की गई है ताकि नीति का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।
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