लोक नृत्य ने मोहा मन 'बोलियों का जागर' कार्यक्रम संपन्न, 56 बोलियों की विरासत पर चर्चा

Boliyon Ka Jagar: मराठी भाषा संवर्धन पखवाड़े के तहत ‘बोलियों का जागर’ कार्यक्रम में लोककलाकारों की शोभायात्रा व डॉ. सुभाष बागल की पुस्तक का विमोचन किया गया।
Folk dances captivated hearts; the 'Awakening of Dialects' program concluded with discussions on the heritage of 56 dialects
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Sambhajinagar Language Festival Event: छत्रपति संभाजीनगर राज्य सरकार के मराठी विभाग, भाषा संचालनालय व विवेकानंद कॉलेज की ओर से मराठी भाषा संवर्धन पखवाड़े के अवसर पर 'बोलियों का जागर' कार्यक्रम संपन्न हुआ।

इसकी शुरुआत ग्रंथ दिंडी व पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोककलाकारों की शोभायात्रा से हुई, इसमें बंजारा, गोपाल, नंदीवाले, सांकेतिक बोली, पिंगला आदि लोककलाकार लोकवाद्यों के साथ शामिल हुए।

इस मौके पर डॉ. सुभाष बागल की पुस्तक 'महानुभव साहित्य व मूल्यविचार' का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मराठी साहित्य के वरिष्ठ अध्येता डॉ. सतीश बडवे ने किया। अध्यक्षता प्राचार्य दादाराव शेंगुले ने की। मंच पर राज्य के भाषा सह-निदेशक शरद यादव, अनुवादक आनंद गांगणे, महेश लगड़, दिलीप लादे, डॉ गणेश सावजी, विजयालक्ष्मी सनस व मराठी विभागाध्यक्ष डॉ दत्तात्रय डुंबरे मौजूद थे।

डुंबरे ने कहा कि ज्ञानेश्वरी में 56 बोलियों का समावेश है। संत साहित्य में विभिन्न बोलियां किस प्रकार अभिव्यक्त हुई हैं, इसका उन्होंने उदाहरणों सहित विवेचन किया। गांगणे ने कार्यक्रम आयोजन के पीछे सरकार की भूमिका स्पष्ट की।

बडवे ने कहा कि इन विविध बोलियों के कारण ही मराठी भाषा समृद्ध हुई है, साथ ही सांकेतिक बोलियों व सांकेतिक भाषाओं का संरक्षण व संवर्धन भी आवश्यक है। शेंगुले ने कहा कि भाषा जीवित रहेगी तभी संस्कृति भी जीवित रहेगी।

भाषा की समृद्धि पर विचार

दूसरे सत्र में डॉ. ललिता गोपाल ने गोपाल बोली पर व डॉ. केशरचंद राठौड ने सांकेतिक बोली पर शोधपत्र पेश किए, बतौर प्रमुख अतिथि शाहीर डॉ, शेषराव पठाडे उपस्थित थे।

सत्र की अध्यक्षता शाहीर डॉ. समाधान इंगले ने की, जिन्होंने ग्रामीण बोलियों के जरिए भाषा की समृद्धि पर विस्तृत विचार रखे। तीसरे सत्र में कॉलेज के खुले रंगमंच पर बंजारा लोक कलाकारों व गोपाल समाज के कलाकारों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देने वाली लोककलाओं की प्रस्तुतियां दी। परिचय डुंबरे ने दिया व डॉ. विठोबा मरके ने संचालन किया। डॉ. अनिरुद्ध मोरे ने आभार माना।

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