

Bhandara Leopard Rescue: नगर्रा बघेड़ा वनपरिक्षेत्र तुमसर के अंतर्गत दो दिनों से अपनी मां से बिछड़े तेंदुए के दो शावकों का आखिरकार सुरक्षित पुनर्मिलन हो गया। वन विभाग की सतर्कता, धैर्य और सुनियोजित रणनीति के चलते यह भावुक क्षण संभव हो सका। यह पूरी घटना वन्यजीव संरक्षण के प्रति वन विभाग की संवेदनशीलता और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है। घटना के संदर्भ में बताया जा रहा है कि, येरली गांव स्थित एक कुएं में लगभग छह माह के दो तेंदुए के शावक गिर गए थे।
ग्रामीणों की ओर से इसकी सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम तत्काल मौके पर पहुंची। टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए दोनों शावकों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें उनकी मां से मिलाने के प्रयास शुरू कर दिए। रेस्क्यू के उसी शाम उन्हें घटनास्थल के समीप रखा गया, लेकिन काफी देर तक इंतजार करने के बावजूद मादा तेंदुआ वहां नहीं पहुंची।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दोनों शावकों को वन विभाग ने अपने संरक्षण में रख लिया। इसी दौरान एक अन्य संकटपूर्ण घटना घटित हुई, जिसमें सोदेपुर जंगल क्षेत्र में मवेशी चरा रहे गोबरवाही निवासी एक व्यक्ति की बाघ के हमले में मृत्यु हो गई। इस गंभीर हादसे के बाद वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर आवश्यक जांच और कार्रवाई करनी पड़ी। पंचनामा सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए तुमसर ग्रामीण अस्पताल भेजा गया।
इस बेहद व्यस्त और तनावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद वन विभाग ने शावकों को उनकी मां से मिलाने के अपने प्रयास को नहीं रोका। मंगलवार शाम करीब 7 बजे दोनों शावकों को उसी जंगल क्षेत्र में एक सुरक्षित पिंजरे में रखा गया, जहां वे मिले थे, ताकि उनकी मां उन्हें आसानी से खोज सके। रात करीब 930 बजे मादा तेंदुआ बेहद सावधानीपूर्वक पिंजरे के पास पहुंची। अपनी मां की आहट मिलते ही दोनों शावकों ने स्वाभाविक आवाजें निकालनी शुरू कर दीं।
स्थिति पूरी तरह सुरक्षित होने की पुष्टि के बाद वहां तैनात वन विभाग के कर्मचारियों ने साहस और सतर्कता का परिचय देते हुए पिंजरे का दरवाजा खोल दिया। दरवाजा खुलते ही दोनों शावक तेजी से दौड़कर अपनी मां के पास पहुंचे और मादा तेंदुआ उन्हें अपने साथ सुरक्षित जंगल की ओर ले गई।
मां और शावकों के इस भावुक मिलन को देखकर मौके पर मौजूद वन अधिकारी, कर्मचारी तथा ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे। दो दिनों की जुदाई के बाद हुआ यह पुनर्मिलन प्रकृति के अटूट स्नेह और वन विभाग की संवेदनशील कार्यशैली का जीवंत उदाहरण बन गया। यह संपूर्ण अभियान उप वनसंरक्षक डीसीएफ योगेंद्र सिंह के कुशल मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
इस रेस्क्यू और पुनर्मिलन अभियान में सहायक वन अधिकारी रितेश भोंगाड़े, वन परिक्षेत्र अधिकारी सी। जी। रहांगडाले, वनरक्षक राकेश वाघाड़े, बीट गार्ड सुश्री मांढरे, तुमसर रैपिड रेस्क्यू टीम आरआरटी, भंडारा डिवीजनल आरआरटी टीम तथा बायोलॉजिस्ट शुभम मोदनकर का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा।