महाराष्ट्र में जमीन उपयोग नियमों में बड़ा बदलाव, अब एनए अनुमति के लिए कलेक्टर की मंजूरी जरूरी नहीं

Maharashtra Government ने जमीन के गैर-कृषि (एनए) उपयोग की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए अलग अनुमति की बाध्यता खत्म कर दी है। अब स्वीकृत निर्माण नक्शा ही एनए अनुमति माना जाएगा।
Chandrashekhar Bawankule
चंद्रशेखर बावनकुले (सौ. सोशल मीडिया )
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Maharashtra NA Land Rule Change: महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने जमीन के उपयोग को लेकर एक क्रांतिकारी कदम उठाया है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देशानुसार, राज्य के राजस्व विभाग ने जमीन राजस्व कानून में बड़ा संशोधन करते हुए जमीन के गैर-कृषि अर्थात एनए (नॉन-एग्रीकल्चर) इस्तेमाल के लिए अलग से अनुमति लेने की बाध्यता को समाप्त कर दिया है।

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के इस निर्णय की घोषणा करने से जमीन मालिकों को बड़ी राहत मिली है और अब उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार का मानना है कि इस कदम से 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा मिलेगा और आम आदमी का प्रशासनिक उत्पीड़न कम होगा।

एनए लेने की शर्त पूरी तरह हटी

नए बदलावों के अनुसार, अब अकृषक (एनए) भूमि के लिए अलग से जिला कलेक्टर की मंजूरी लेने की शर्त पूरी तरह हटा दी गई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि सक्षम प्राधिकारी किसी निर्माण का नक्शा (कंस्ट्रक्शन प्लान) मंजूर कर लेते हैं, तो उसी मंजूर नक्शे को ही 'एनए' अनुमति माना जाएगा।

नहीं वसूला जाएगा अकृषक कर

मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, अब सालाना अकृषक कर नहीं वसूला जाएगा, जमीन मालिकों को अब बार-बार टैक्स देने के बजाय केवल एक बार 'रूपांतरण अधिमूल्य' (कन्वर्जन प्रीमियम) का भुगतान करना होगा।

यदि निर्माण योजना मंजूर है, तो अलग से 'सनद' लेने की भी जरूरत नहीं होगी। राजस्व विभाग ने इस नई कार्यपद्धति को लागू कर दिया है और इसे आधिकारिक राजपत्र (गजट) में भी प्रकाशित कर दिया गया है। अब तक जमीन को खेती से गैर-खेती (NA) में बदलने की प्रक्रिया बेहद जटिल, समय लेने वाली और कागजी कार्रवाई से भरी होती थी। पहले जमीन मालिकों को कई तरह के दस्तावेज जमा करने पड़ते थे, जो अब गुजरे जमाने की बात हो जाएगी। इस नई कार्य पद्धति से कई लाभ होंगे।

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