अजित पवार के निधन से गोदावरी तट हुआ अनाथ, सायखेड़ा-चांदोरी को बाढ़ मुक्त करने वाले ‘जननायक’ का दुखद अंत
Saykheda Chandori Flood Relief: अजित पवार के आकस्मिक निधन से निफाड़ तालुका शोक में डूब गया है, जहां सायखेड़ा–चांदोरी को बाढ़ से मुक्त कराने में उनके ऐतिहासिक योगदान को आज भी लोग याद कर रहे हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
Nandur Madhmeshwar dam (सोर्सः सोशल मीडिया)
Godavari River Flood: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं विकास पुरुष अजित पवार के आकस्मिक निधन की खबर से पूरे निफाड़ तालुका में शोक की लहर दौड़ गई है। अपनी अनुशासित कार्यशैली और ‘जुबान के पक्के’ नेता के रूप में विख्यात दादा के जाने से निफाड़ के विकास का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है। विशेष रूप से सायखेड़ा और चांदोरी गांवों के लिए उनके द्वारा लिए गए निर्णय वहां के निवासियों के लिए जीवनदान साबित हुए थे।
2006 की भीषण बाढ़ और दादा की तत्परता
वर्ष 2006 में गोदावरी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने सायखेड़ा और चांदोरी गांवों को जलमग्न कर दिया था, जिससे सैकड़ों परिवार बेघर हो गए थे। इस भयावह स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विधायक दिलीप बनकर ने अजित पवार को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया था। उन्होंने सुझाव दिया था कि यदि नांदूर मधमेश्वर बांध में गेट (दरवाजे) लगाए जाएं, तो इन गांवों को बाढ़ से स्थायी राहत मिल सकती है। अजित दादा ने बिना किसी देरी के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी और आवश्यक निधि तत्काल आवंटित की।
विकास का वादा निभाया
अजित पवार द्वारा दिया गया यह वादा अगले दो से तीन वर्षों में हकीकत बन गया। नांदूर मधमेश्वर बांध में आठ गेट लगाए जाने से बाढ़ के पानी की निकासी तेज हुई और सायखेड़ा–चांदोरी क्षेत्र में बाढ़ का खतरा काफी हद तक कम हो गया। इस निर्णय से न केवल हजारों घर सुरक्षित हुए, बल्कि बांध के किनारे स्थित हजारों एकड़ कृषि भूमि भी संरक्षित हो सकी।
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अधूरा सपना और अंतिम प्रयास
दो वर्ष पहले विधायक दिलीप बनकर ने शेष अतिरिक्त गेटों की मांग फिर से अजित पवार के समक्ष रखी थी। उस समय भी उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए आवश्यक निधि को मंजूरी दी थी। आज नांदूर मधमेश्वर बांध पर इन अतिरिक्त गेटों का कार्य प्रगति पर है, लेकिन विडंबना यह है कि इस ऐतिहासिक परियोजना को पूर्ण होते देखने के लिए दादा आज हमारे बीच नहीं हैं।
निफाड़ में शोक
प्रशासन पर अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले और आम जनता के लिए अहोरात्र संघर्ष करने वाले एक सशक्त नेता के निधन से पूरा क्षेत्र शोकाकुल है। निफाड़ के विकास में उनके योगदान को यहां की धरती और जनता सदैव स्मरण रखेगी।
