
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
IRGC Terrorist Organization: यूरोपीय संघ ने गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाते हुए ईरान की अर्धसैनिक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकी संगठनों की सूची में शामिल कर लिया है। ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने ब्रसेल्स में घोषणा की कि सभी 27 सदस्य देशों के विदेश मंत्री इस फैसले पर एकमत थे।
कल्लास ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यदि आप एक आतंकवादी की तरह व्यवहार करते हैं, तो आपके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए। अब IRGC को अल-कायदा, हमास और आईएसआईएस जैसे संगठनों के बराबर रखा जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में हाल के हफ्तों में हुए विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए की गई सैन्य कार्रवाई में कम से कम 6,373 लोग मारे गए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, मृतकों में 113 बच्चे भी शामिल हैं और अब तक 42,450 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ईयू ने IRGC के शीर्ष कमांडरों सहित 15 अधिकारियों और इंटरनेट पर निगरानी रखने वाले 6 संगठनों पर भी कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।
ईयू के इस फैसले का असर ईरान की पहले से ही पस्त अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। गुरुवार को ईरान की मुद्रा ‘रियाल’ रिकॉर्ड निचले स्तर 1.6 मिलियन (16 लाख) प्रति $1 पर पहुंच गई। ईयू के प्रतिबंधों का मतलब है कि संबंधित अधिकारियों की संपत्तियां फ्रीज कर दी जाएंगी और उनके यूरोप की यात्रा करने पर प्रतिबंध होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि IRGC को आतंकी सूची में डालना तेहरान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इस अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच, ईरान ने समुद्र में सैन्य अभ्यास की चेतावनी दी है। तेहरान ने जहाजों को संदेश भेजा है कि वह रविवार और सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में लाइव फायरिंग के साथ ‘नौसेना अभ्यास’ करेगा। गौरतलब है कि दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान के कट्टरपंथी मीडिया ने यह भी संकेत दिया है कि यदि अमेरिका ने कोई गलती की, तो वे दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के इस मुख्य रास्ते को बंद कर सकते हैं।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई की धमकियों के बीच, अमेरिकी नौसेना ने विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और कई मिसाइल विध्वंसक जहाजों को मध्य पूर्व में तैनात कर दिया है। यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप बल प्रयोग का फैसला कब लेंगे, लेकिन क्षेत्र में युद्ध की आशंका बढ़ गई है।






