कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखाओ काम...नागपुर हाई कोर्ट का मनपा को झटका! 15 दिन का दिया समय

Nagpur High Court Greenery: नागपुर हाई कोर्ट ने पेड़ों को कंक्रीट मुक्त करने के मनपा के दावों को नकारा। 15 दिनों का अल्टीमेटम। 9,000 पेड़ों की जान खतरे में; लापरवाह अधिकारियों पर गिरेगी गाज।
Nagpur High Court slams NMC over "concrete-free trees" claims. 15-day ultimatum issued to save 9,000 trees. Officials to face action for negligence.
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
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Concrete Free Trees Nagpur: नागपुर शहर में पेड़ों के चारों ओर जमे कंक्रीट को हटाने और उन्हें बचाने के उद्देश्य से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया।

शरद पाटिल द्वारा दायर इस याचिका पर सुनवाई के दौरान मनपा ने दावा किया कि पिछले 2 वर्षों में कुल 7,449 पेड़ों के बुंधों को कंक्रीट मुक्त कर दिया गया है। हालांकि, अदालत ने इन आंकड़ों पर असंतोष व्यक्त किया और प्रशासन से जमीनी हकीकत की विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

दस्तावेजों और वास्तविकता में अंतर

अदालत द्वारा गठित 3 सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, शहर में लगभग 9,000 पेड़ कंक्रीट के जाल में फंसे होने की आशंका है। नागपुर मनपा की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता जैमिनी कासट ने कोर्ट में हलफनामा पेश कर बताया कि मार्च 2025 में 3,326 और फरवरी 2026 में 4,123 पेड़ों पर कार्यवाही की गई लेकिन दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति के बीच भारी अंतर को देखते हुए अदालत ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

लापरवाह अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि 15 दिनों के भीतर पेड़ों को कंक्रीट मुक्त नहीं किया गया, तो कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के नाम सौंपने होंगे। इसी आदेश के अनुपालन में मनपा ने जोन स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों के नाम हाई कोर्ट को सौंप दिए हैं।

अदालत ने अब प्रशासन को आदेश दिया है कि वह शहर के कुल प्रभावित पेड़ों, क्षेत्रवार आंकड़ों और वास्तव में की गई कार्रवाई की एक विस्तृत और सटीक रिपोर्ट पेश करे। इस मामले ने शहर में पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रशासनिक गंभीरता पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

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