आवारा मवेशियों के मालिकों को अब होगी जेल: बेसा-पिपला नगर पंचायत का सख्त नोटिस, 3,000 जुर्माना भी लगेगा!

Nagpur Cattle Notice: बेसा-पिपला नगर पंचायत ने सड़कों पर खुले घूमने वाले मवेशियों को लेकर पशुपालकों को सख्त चेतावनी दी है। नियम तोड़ने पर जेल, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
Owners of stray cattle now face jail: Besa-Pipla Nagar Panchayat issues strict notice; a fine of ₹3,000 will also be imposed!
बेसा-पिपला नगर पंचायत, आवारा मवेशी (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Besa Pipla Stray Cattle: नागपुर शहर में सड़कों पर मवेशियों के बढ़ते खतरे पर लगाम लगाने के लिए बेसा-पिपला नगर पंचायत ने पशु पालकों को एक सख्त सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। इसमें चेतावनी दी गई है कि यदि उनके जानवर सार्वजनिक सड़कों पर खुले घूमते पाए गए तो मुंबई पुलिस अधिनियम, 1951 के तहत एक महीने तक की जेल, 3,000 रुपये का जुर्माना या दोनों तरह की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

नगर निकाय ने कहा कि बिना देखरेख के घूम रहे मवेशी अक्सर यातायात में बाधा डालते हैं, दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ाते हैं और यात्रियों की जान-माल के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। इस अधिसूचना में आगे चेतावनी दी गई है कि यदि कोई आवारा जानवर किसी दुर्घटना, चोट या मौत का कारण बनता है तो इसके लिए मालिक को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

जो पशु पालक सड़कों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर मवेशियों को बांधते हैं उन्हें महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, 1965 के तहत भी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

जब्त होंगे जानवर

नगर पंचायत ने कड़ी प्रवर्तन (एन्फोर्समेंट) उपायों की घोषणा की है। सड़कों पर पाए जाने वाले किसी भी आवारा मवेशी को जब्त कर लिया जाएगा, मालिकों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाएंगे और कानून के अनुसार जुर्माना लगाया जाएगा, अधिकारियों ने कहा कि बार-बार नियम तोड़ने वालों को और भी सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

स्वास्थ्य और स्वच्छता समिति के अध्यक्ष जितेंद्र चंदुरकर ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे बेसा-पिपला क्षेत्र में यह मुद्दा एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि आवारा जानवर सड़क दुर्घटनाओं, ट्रैफिक जाम का कारण बन रहे हैं और नागरिकों के जीवन को खतरे में डाल रहे है।

नियमों का अब कोई उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पशु पालकों को अपने जानवरों को सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए और उन्हें सार्वजनिक सड़कों पर नहीं घूमने देना चाहिए।

मानसून में है जरूरी

मुख्य अधिकारी भारत नंदनवार ने बताया कि कानूनी प्रावधान पहले से ही मौजूद थे लेकिन विशेष रूप से मानसून के दौरान उनके सख्त क्रियान्वयन की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि नियम हमेशा से रहे हैं लेकिन कड़ाई से लागू करने की जरूरत थी।

मानसून के दौरान कई मालिक अपने मवेशियों को चराने के लिए बाहर छोड़ देते हैं और मैंने व्यक्तिगत रूप से ऐसे मामले देखे हैं जहां मवेशियों ने यातायात को बाधित किया। इस नोटिस का उद्देश्य ऐसी स्थिति पैदा होने से पहले ही रोकना है, ताकि कोई गंभीर दुर्घटना न हो।

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