हाई कोर्ट: सावनेर की जर्जर आंगनवाड़ियों पर स्वतः संज्ञान, पूछा- खतरनाक इमारतों में कैसे पढ़ रहे मासूम?

Nagpur High Court Suo Motu: सावनेर की जर्जर आंगनवाड़ियों पर हाई कोर्ट सख्त। जनहित याचिका के रूप में स्वतः संज्ञान लिया। बच्चों की सुरक्षा पर जताई चिंता। अधिवक्ता अश्विनी आठले अदालत मित्र नियुक्त।
Nagpur High Court takes suo motu cognizance of dilapidated Anganwadis in Savner. Adv. Ashwini Athale appointed amicus curiae to look into the safety of children.
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
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Saoner Anganwadi News: नागपुर जिले के सावनेर नगरपालिका क्षेत्र में आंगनवाड़ी इमारतों की जर्जर स्थिति और उनकी अपर्याप्त संख्या को लेकर समाचार पत्र में छपी खबर पर स्वयं संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर लिया। याचिका के रूप में प्रेषित करने तथा अदालत की मदद के लिए न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने अधिवक्ता अश्विनी आठले की अदालत मित्र के रूप में नियुक्ति भी की।

समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार सावनेर नगर परिषद के अधिकार क्षेत्र में आंगनवाड़ियों की संख्या पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा जो केंद्र वर्तमान में संचालित हैं, उनकी स्थिति भी बेहद खराब है। रिपोर्ट के अनुसार सावनेर में 2 आंगनवाड़ियां ऐसी हैं जो बेहद जर्जर और खतरनाक इमारतों में चल रही हैं जहां छोटे-छोटे बच्चों की कक्षाएं होती है।

अत्यंत चिंता का विषय

हाई कोर्ट ने इस मामले को अत्यंत चिंता का विषय बताते हुए कार्यालय को उक्त समाचार लेख और संबंधित दस्तावेज अदालत मित्र को सौंपने के निर्देश दिए, ताकि वे जनहित याचिका नियम, 2010 के अनुसार एक उचित याचिका दायर कर सकें। इस मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव और अन्य संबंधित अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है। विदित हो कि सरकार की एकीकृत बाल विकास सेवा योजना (ICDS) के तहत आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और माताओं के स्वास्थ्य संवर्धन के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं लेकिन सावनेर में इन केंद्रों की कमी और उपलब्ध भवनों की दयनीय स्थिति ने प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जरूरत 15 की, चल रहे सिर्फ 6 केंद्र

रिपोर्ट के अनुसार सावनेर तहसील के ग्रामीण इलाकों में जिला परिषद के तहत 215 आंगनवाड़ियां कार्यरत हैं जहां स्थिति अपेक्षाकृत संतोषजनक है। इसके विपरीत नगरपालिका क्षेत्र में स्थिति बेहद खराब है।

नियमों के अनुसार 600 से 1500 की जनसंख्या वाली बस्तियों में कम से कम 12 से 15 आंगनवाड़ियों की आवश्यकता है लेकिन वर्तमान में केवल 6 केंद्र ही संचालित हो रहे हैं। इस कमी के कारण बच्चों और माताओं को मिलने वाली आवश्यक सरकारी सेवाओं में भारी बाधा आ रही है।

किराये के कमरों और जर्जर भवनों में भविष्य

क्षेत्र की कई आंगनवाड़ियां अपनी खुद की जमीन या भवन तक नहीं रखती हैं। चिचपुरा, माताखेड़ी, सटवामाता मंदिर और पहलेपार की 4 आंगनवाड़ियां निजी स्थानों पर किराये पर चलाई जा रही हैं। वहीं जूनी गुजरखेड़ी और नाग मंदिर स्थित जो 2 केंद्र सरकारी जमीन पर हैं उनकी हालत अत्यंत दयनीय है।

जूनी गुजरखेड़ी की इमारत की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं वहां सुरक्षा दीवार नहीं है और बिजली की भी उचित व्यवस्था नहीं है। हैरानी की बात यह है कि अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किए जाने के बावजूद अब तक मरम्मत या निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।

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