नागपुर गोरेवाड़ा तालाब प्रदूषण पर HC सख्त; मनपा को 6 हफ्ते का अल्टीमेटम, पूछा-सीधे सीवेज क्यों छोड़ा जा रहा?

Nagpur Municipal Corporation: गोरेवाड़ा तालाब में बिना शोधन के सीवेज छोड़े जाने के मामले में हाई कोर्ट ने मनपा को 6 सप्ताह के भीतर उचित निर्णय लेने व पर्यावरणीय संकट पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
HC takes a tough stance on pollution in Nagpur's Gorewada Lake; issues a 6-week ultimatum to the Municipal Corporation, asking why raw sewage is being discharged directly into it.
नागपुर मनपा, गोरेवाड़ा तालाब, (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Gorewada Lake Water Pollution: नागपुर शहर के महत्वपूर्ण गोरेवाड़ा तालाब के संरक्षण और उसमें छोड़े जा रहे दुषित पानी को लेकर पार्षद शैलेश पांडे ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। मंगलवार को याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने महानगरपालिका को इस गंभीर पर्यावरण और जनस्वास्थ्य मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने और 6 सप्ताह के भीतर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की पैरवी कर रहे अधि। मिश्रा ने न्यायालय को अवगत कराया गया कि गोरेवाड़ा तालाब में बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे सीवेज (गंदा पानी) छोड़ा जा रहा है। इस प्रदूषण से न केवल तालाब के जलीय जीवों को अपूरणीय पर्यावरणीय नुकसान पहुंच रहा है बल्कि यह आम जनता के स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा बन चुका है।

तालाब संरक्षण के तत्काल उठाएं कदम

याचिका में मांग की गई थी कि प्रशासन और विशेषकर नागपुर महानगरपालिका द्वारा तालाब के संरक्षण के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं और सुरक्षा व जल ट्रीटमेंट प्रणाली स्थापित की जाए। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने इस जनहित याचिका का निपटारा करते हुए महानगरपालिका को जनहित याचिका को निवेदन के रूप में स्वीकार करने का आदेश दिया। साथ ही कोर्ट ने मनपा को निर्देश दिया है कि वह इस जनहित याचिका और इसमें मांगी गई राहतों को एक आधिकारिक शिकायत के रूप में स्वीकार करे।

याचिकाकर्ता को भी निर्देश

मनपा को आदेश दिया गया है कि वह न्यायालय का आदेश प्रस्तुत किए जाने के 6 सप्ताह के भीतर याचिका में उठाए गए सभी बिंदुओं पर कानून के अनुसार और गुण-दोष के आधार पर विचार कर अपना निर्णय ले।

कोर्ट के आदेश के अनुपालन में याचिकाकर्ता शैलेश पांडे को एक सप्ताह के भीतर मनपा के समक्ष अपनी याचिका और कोर्ट के इस आदेश की प्रति प्रस्तुत करनी होगी। साथ ही मनपा इस मुद्दे पर जो भी अंतिम फैसला लेगी, उसकी आधिकारिक जानकारी निर्णय की तारीख से 2 सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को देनी होगी। इस आदेश के साथ ही हाई कोर्ट ने गोरेवाड़ा तालाब को बचाने के लिए दायर इस जनहित याचिका का अंतिम रूप से निपटारा कर दिया।

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