निवेश के नाम पर फर्जीवाड़ा? हाई कोर्ट के आदेश को हल्दीराम ने दी चुनौती, सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

Haldiram Group Fraud Case: हल्दीराम ग्रुप ने 9.38 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी मामले में HC द्वारा एफआईआर रद्द करने के आदेश को SC में चुनौती दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
Fraud in the Name of Investment? Haldiram's Challenges High Court Order; Supreme Court Issues Notice
हल्दीराम ग्रुप, धोखाधड़ी मामला, सुप्रीम कोर्ट,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Financial Fraud: नागपुर हल्दीराम ग्रुप के साथ 9.38 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने का आदेश दिया। हल्दीराम की ओर से अधि। मुकुल रोहतगी, अधि। सिद्धार्थ दवे, अधि। मनन डागा, अधि। राजेन्द्र डागा ने पैरवी की।

इस मामले में रॉयल ड्राई फ्रूट्स प्राइवेट लिमिटेड (आरडीएफपीएल) और उसके निदेशकों पर निवेश के नाम पर फर्जीवाड़ा करने और पैसों की हेराफेरी का आरोप है जिसमें हाई कोर्ट द्वारा आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी गई थी। इसे चुनौती देते हुए अब हल्दीराम ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अधि, मनन डागा ने याचिका में बताया कि यह मामला दिसंबर 2022 में शुरू हुआ था, जब आरडीएफपीएल के निदेशक ने निवेश के लिए हल्दीराम ग्रुप से संपर्क किया था। आरोप है कि उन्होंने कंपनी के फर्जी और मनगढ़ंत वित्तीय दस्तावेज, बड़े हुए बिक्री के आंकड़े और इन्वेंट्री दिखाकर हल्दीराम ग्रुप को निवेश के लिए लुभाया। इन झूठे दावों पर भरोसा करते हुए हल्दीराम ग्रुप की कंपनियों- ओएम इंडस्ट्रीज और हर्षिव हेल्दी फूड्स ने आरडीएफपीएल और उसके निदेशकों के खातों में 3 दिसंबर 2022 से 20 अक्टूबर 2023 के बीच कुल 9,38,59,003 रुपये ट्रांसफर किए।

अधिकार क्षेत्र का हुआ उल्लंघन

सुको में दायर याचिका में दलील दी गई है कि हाई कोर्ट ने एफआईआर को रद्द करते समय एक 'मिनी ट्रायल' चलाकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है। याचिका में कहा गया है कि मामले की जांच अभी शुरुआती दौर में थी और चार्जशीट भी दाखिल नहीं हुई थी। हाई कोर्ट ने आरोपियों द्वारा किए गए स्पष्ट वित्तीय हेरफेर और पैसों की हेराफेरी से जुड़े ठोस सबूतों को नजरअंदाज कर दिया। इसके अतिरिक्त मुख्य आरोपी ने हाई कोर्ट के समक्ष जांच में सहयोग करने का झूठा आश्वासन दिया और पेश होने से भी कतराता रहा। हल्दीराम ग्रुप की इस विशेष अनुमति याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने का आदेश दिया।

कंपनी के बजाय निजी खातों में ट्रांसफर किए गए पैसे

निवेश का मुख्य उद्देश्य आरडीएफपीएल के व्यापारिक संचालन, बैंक किस्तों और कच्चे माल की खरीद में मदद करना था लेकिन आरोपियों ने इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी के लिए न करके इसे अपने निजी लाभ के लिए निकाल लिया। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि प्रतिवादियों ने कंपनी के खाते से धोखाधड़ी करते हुए करोड़ों अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिए, आरोपियों की धोखाधड़ी की नीयत इसी बात से स्पष्ट होती है कि उन्होंने साउथ इंडियन बैंक द्वारा लगाए गए सख्त प्रतिबंधों की जानकारी हल्दीराम ग्रुप से छिपाई गी।

इसके अलावा, जब धोखाधड़ी का अहसास होने पर निवेश वापस मांगा गया तो आरोपियों ने हल्दीराम ग्रुप को 3.12.26.497 और 44,82,003 रुपये के 2 चेक दिए थे। ये दोनों चेक बाउंस हो गए क्योंकि आरोपियों ने खुद बैंक को भुगतान रोकने का निर्देश दिया था। नियमों का उल्लंघन करते हुए साउथ इंडियन बैंक की पूर्व अनुमति के चिना बेसिन कैथोलिक को-ऑपरेटिव बैंक में एक अनधिकृत दूसरा खाता भी खोल रखा था।

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