महाराष्ट्र के गैर-कृषि विश्वविद्यालयों में 14 मई से आंदोलन,लंबित मांगों पर कर्मचारियों ने दी कामबंद की चेतावनी

Chhatrapati Sambhajinagar News: महाराष्ट्र के विश्वविद्यालयों व कॉलेजों के गैर-शिक्षकीय कर्मचारी 14 मई से आंदोलन करेंगे। सातवें वेतन आयोग व पुरानी पेंशन समेत मांगें नहीं मानीं तो 1 जून से काम बंद होगा
Non-teaching staff of Maharashtra's non-agricultural universities will launch a statewide protest from May 14 over pending demands, including the 7th Pay Commission and Old Pension Scheme.
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maharashtra University News: छत्रपति संभाजीनगर राज्य के गैर-कृषि विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में कार्यरत गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर 14 मई 2026 से चरणबद्ध राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। इस आंदोलन में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय सहित राज्यभर के विश्वविद्यालयों के कर्मचारी शामिल होंगे। आंदोलन की घोषणा "महाराष्ट्र राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयीन सेवक संयुक्त कृती समिति" की ओर से की गई है।

समिति के राज्य कार्याध्यक्ष डॉ. कैलास पाथ्रीकर ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्षों से लंबित मांगों को लेकर कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को कई बार निवेदन देने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होने से अब आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। मंगलवार को समिति के प्रतिनिधिमंडल ने कुलगुरु डॉ. विजय पाथ्रीकर और कुलसचिव डॉ। प्रशांत अमृतकर से मुलाकात कर मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

इस प्रतिनिधिमंडल में राज्य कार्यकारिणी सदस्य अनिल खामगांवकर, सचिव मनोज शेटे सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रतिनिधि उपस्थित थे। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सातवें वेतन आयोग के अनुसार 10, 20 और 30 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले कर्मचारियों को आश्वासित प्रगति योजना (ACP/MACP) का लाभ देना शामिल है। इसके साथ ही सातवें वेतन आयोग की सभी शिफारिशों को पूर्ण रूप से लागू करने, वर्ष 2005 से पूर्व भर्ती प्रक्रिया वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने तथा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में रिक्त पड़े गैर-शिक्षकीय पदों पर तत्काल भर्ती करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।

इसके अलावा कर्मचारियों ने सेवानिवृत्त कर्मियों के रजा नकदीकरण से संबंधित लंबित मामलों का तत्काल निपटारा करने, प्रयोगशाला सहायकों के वेतन निर्धारण में विसंगतियां दूर करने तथा पदोन्नति प्रक्रिया में 80 प्रतिशत पद आरक्षित रखने की मांग भी सरकार और प्रशासन के समक्ष रखी है।

लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी करेंगे काम बंद

संयुक्त कृती समिति द्वारा घोषित आंदोलन कार्यक्रम के अनुसार 14 से 16 मई तक कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। इसके बाद 18 से 20 मई तक छत्रपति संभाजीनगर विश्वविद्यालय और महाविद्यालय परिसरों में धरना, विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की जाएगी। 25 मई को राज्यव्यापी "लेखनी बंद" आंदोलन किया जाएगा, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की संभावना है।

वहीं 29 मई को विभागीय सहसंचालक कार्यालयों के सामने धरना प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 1 जून 2026 से अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन शुरू किया जाएगा।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है, जबकि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था इन्हीं कर्मचारियों के भरोसे चलती है। आंदोलन के चलते आने वाले दिनों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के दैनंदिन कामकाज पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

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