परीक्षा प्रणाली में भारी गड़बड़ी? हाई कोर्ट पहुंचा नागपुर विश्वविद्यालय मामला, जांच समिति पर सवाल

Nagpur University Result: नागपुर विश्वविद्यालय की परीक्षा और रिजल्ट में गड़बड़ियों को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई। कोर्ट ने रजिस्ट्रार को तलब कर जवाब मांगा है।
Major Irregularities in the Examination System? Nagpur University Case Reaches High Court; Questions Raised Over Inquiry Committee
नागपुर विश्वविद्यालय,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur University Result Controversy: नागपुर राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली और परिणामों में हो रही भारी गड़बड़ियों को लेकर नीरज धाराशिवकर ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश रजनीश व्यास ने कड़ा रुख अपनाते हुए विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को तलब कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि इस भारी कुप्रबंधन की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन क्यों न किया जाए।

अदालत ने इससे पहले जनहित याचिका (PIL) का संज्ञान लिया था जिसमें विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली में मौजूद गंभीर खामियों को उजागर किया गया था। विशेषतः विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की पोल खोलते हुए सिटी के तमाम समाचार पत्रों की ओर से विशेष खबर प्रकाशित की गई थी। इन रिपोर्ट्स में स्पष्ट रूप से दिखाया गया था कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गई मार्कशीट के 'मार्क्स कॉलम' में कई बड़ी गलतियां की गई हैं।

B.Sc. में दे दिया ऐसा विषय जो कोर्स में था ही नहीं

मामले में अदालत मित्र के रूप में पेश हुए अधिवक्ता भूषण मोहता ने अदालत के सामने विश्वविद्यालय की लापरवाही का एक चौकाने वाला उदाहरण पेश किया।

उन्होंने बताया कि बी.एससी (B.Sc) 8वें सेमेस्टर के परिणाम में 'ऑडिट' को एक विषय के रूप में दर्शाया गया है, जबकि यह विषय कभी भी इस पाठ्यक्रम का हिस्सा था ही नहीं।

गंभीर टिप्पणियों के साथ अदालत ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर परीक्षा प्रणाली में हुए इस कुप्रबंधन की जांच के लिए समिति गठित करने के विषय में रपष्टीकरण मांगा है।

छात्र समाज की रीढ़ हैं, अदालत मूक दर्शक नहीं रह सकती

इस घोर लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी करते हुए न्या. व्यास ने एक संस्कृत श्लोक 'विद्यार्थिनः समाजस्य मेरुदण्डः' का उल्लेख किया जिसका अर्थ है कि छात्र समाज की रीढ़ होते हैं।

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से यह कुप्रबंधन स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रहा है और अगर इन गलतियों की सूची बनाई जाए तो कई पन्ने भर जाएंगे, अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि जिस तरह से परिणाम घोषित किए जा रहे हैं, वह प्रथमदृष्टया नागपुर विश्वविद्यालय की विफलता को दर्शाता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब यह मुद्दा सीधे तौर पर छात्रों के जीवन और भविष्य को प्रभावित करता है तो अदालत मूक दर्शक नहीं बनी रह सकती।

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