नागपुर के MSME संकट में, डीजल और कच्चा माल बना बड़ी चुनौती; सरकार से हस्तक्षेप की मांग

Nagpur Industries: ईंधन और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने नागपुर के औद्योगिक क्षेत्र, खासकर MSME इकाइयों पर दबाव बढ़ा दिया है। उद्योग जगत ने सरकार से तत्काल राहत की मांग की है।
Nagpur's MSMEs in Crisis: Diesel and Raw Materials Emerge as Major Challenges; Government Intervention Demanded
नागपुर उद्योग, एमएसएमई संकट, (सोर्स: सौजंय AI)
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Nagpur Industries MSME Crisis: नागपुर औद्योगिक क्षेत्र में ईंधन और कच्चे माल की कीमतों में हुई बेतहाशा वृद्धि ने विनिर्माण इकाइयों विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की कमर तोड़ दी है। एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एमआईए) के अध्यक्ष पी। मोहन ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

डीजल की कीमतों में 25% से अधिक का उछाल

मोहन ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि औद्योगिक डीजल की कीमतें 87 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 109 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गई हैं। इसके साथ ही फर्नेस ऑयल की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों का सीधा असर परिवहन, लॉजिस्टिक्स और उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। इंजीनियरिंग, स्टील, फाउंड्री, केमिकल और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्र इस वृद्धि से बुरी तरह प्रभावित हैं। कम मार्जिन पर काम करने वाले एमएसएमई उद्योग इस अतिरिक्त बोझ को सहन करने में सक्षम नहीं हैं।

प्लास्टिक उद्योग पर दोहरी मार

अध्यक्ष ने विशेष रूप से प्लास्टिक प्रोसेसिंग उद्योगों की गंभीर स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रमुख पॉलिमर (पीपी, पीई, पीवीसी, एचडीपीई, एलएलडीपीई) की कीमतों में कम समय में 50% से 70% तक को भारी वृद्धि हुई है।

महंगाई बढ़ने की आशंका इस संकट का असर केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, पैकेजिंग और परिवहन लागत बढ़ने से एफएमसीजी, फार्मा, ऑटोमोबाइल और कृषि क्षेत्र की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी जिससे आम जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

सरकार से प्रमुख मांगें

करों में कटौती: औद्योगिक ईंधन और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर करों और शुल्कों को युक्तिसंगत बनाया जाए। वित्तीय सहायता: एमएसएमई के लिए अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की व्यवस्था हो। विशेष पैकेज: संकटग्रस्त प्लास्टिक प्रोसेसिंग इकाइयों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित किया जाए। बकाया भुगतान : सरकारी विभागों में रुके हुए उद्योगों के भुगतानों का शीघ्र निपटान हो।

बंद होने की स्थिति

प्लास्टिक उद्योग पूरी तरह पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के कारण कई छोटी इकाइयों अब बंद होने के कगार पर हैं या बहुत कम क्षमता पर काम कर रही हैं। संगठन ने आगाह किया कि यदि समय रहते नीतिगत हस्तक्षेप नहीं किया गया तो उत्पादन में कटौती के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार की हानि हो सकती है और कई छोटी इकाइयां हमेशा के लिए बंद हो सकती हैं।

- अध्यक्ष (MIA), पी. मोहन

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