नागपुर मनपा में भ्रष्टाचार का चक्रव्यूह? काम करवाना है तो चुकानी पड़ती है कीमत! मनपा पर लगे बड़े आरोप

Nagpur Municipal Corporation: नागपुर मनपा के जोन कार्यालयों में भ्रष्टाचार व वसूली के आरोपों ने तूल पकड़ लिया। नागरिकों का दावा है कि उन्हें अनावश्यक परेशानियों व कथित मांगों का सामना करना पड़ रहा है।
A web of corruption at the Nagpur Municipal Corporation? You have to pay a price to get work done! Serious allegations leveled against the civic body.
मनपा, जोन कार्यालय, भ्रष्टाचार, वसूली,(सोर्स: सौजन्य AI)
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Nagpur Corruption Allegations: नागपुर महानगर पालिका (मनपा) के जोन कार्यालयों में इन दिनों नागरिकों को परेशान करने का एक सुनियोजित 'वसूली मॉडल' चल रहा है। शहर के सभी जोन कार्यालयों में आम आदमी से लेकर निर्माण कार्य कराने वाले नागरिक एक सोची-समझी साजिश के तहत शिकार बनाए जा रहे हैं। 'भ्रष्टाचार' का यह चक्रव्यूह इतना व्यवस्थित है कि एक बार फंसने के बाद नागरिक को 'लक्ष्मी' की भेंट चढ़ना ही पड़ता है।

क्या है यह 'वसूली' का खेल

नोटिस का डरः सबसे पहले जोन कार्यालय के इंजीनियर निर्माण कार्य स्थल पर पहुंचते हैं और बिना किसी ठोस आधार के उसे 'अवैध' घोषित कर नोटिस थमा देते हैं। दबाव और मानसिक उत्पीड़नः नोटिस मिलने के बाद जब घबराया हुआ नागरिक जोन कार्यालय पहुंचता है, तो उसे कागजी कार्रवाई और कानूनी दांव-पेच में उलझाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। अधिकारी उसे साफ संकेत देते हैं कि मामला बहुत गंभीर है और भारी जुर्माना या तोड़फोड़ हो सकती है।

'लक्ष्मी' का जादूः जब पीड़ित समाधान के लिए गिड़गिड़ाता है, तब 'लक्ष्मी' की पेशकश होते ही इंजीनियर का रवैया अचानक बदल जाता है।

'लक्ष्मी' का जादूः जब पीड़ित समाधान के लिए गिड़गिड़ाता है, तब 'लक्ष्मी' की पेशकश होते ही इंजीनियर का रवैया अचानक बदल जाता है।

'समाधान' का ढोंगः रिश्वत मिलते ही वही 'अवैध' निर्माण अचानक 'वैध' या 'नियमों के दायरे में आ जाता है। इंजीनियर दोबारा सर्वे का नाटक करता है और फिर कहता है 'सब ठीक है, अब काम कर सकते हैं'।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो निर्माण पहले अवैध था, वह 'समाधान' के बाद अचानक वैध कैसे हो गया? इस 'समाधान' का आधार क्या है, इसका जवाब किसी भी अधिकारी के पास नहीं होता। कागजों पर सब कुछ पहले जैसा ही रहता है। बस इंजीनियर की जेब गरम हो जाती है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

सिटी के जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य वास्तव में अवैध है, तो 'समाधान' कैसे हो जाता है? और यदि वह वैध है, तो नोटिस क्यों दिया गया? यह सीधे तौर पर जनता की गाढ़ी कमाई लूटने का अपराध है। क्या नागपुर महानगर पालिका के आयुक्त इस संगठित लूट का संज्ञान लेंगे? या फिर 'वसूली' का यह खेल इसी तरह चलता रहेगा और आम आदमी अपनी मेहनत की कमाई दलालों के हाथों सौंपता रहेगा। यह समय है कि प्रशासन ऐसे भ्रष्ट इंजीनियरों की संपत्ति की जांच करे और जोन कार्यालयों में चल रहे इस 'समाधान' के खेल को तत्काल बंद करे।

नगरसेवकों की शिकायतें भी बेअसर

सूत्रों के अनुसार कई नगरसेवकों ने इस बाबत शिकायतें की हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। ऐसा लगता है कि जोन स्तर पर इंजीनियरों और बिचौलियों का एक ऐसा गिरोह सक्रिय है, जिसे राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है। क्या मनपा प्रशासन को यह नहीं दिखता कि उसके अधिकारी अपनी पद की गरिमा गिराकर 'वसूली एजेंट' बन चुके हैं।

पॉश इलाकों से तंग बस्तियों तक फैला जाल

  • यह भ्रष्टाचार सिर्फ एक मोहल्ले तक सीमित नहीं है।
  • नागपुर के सभी जोन में यह खेल खुलेआम चल रहा है।
  • तंग बस्तियां: यहां गरीब और मध्यम वर्गीय लोगों को डरा-धमकाकर उनकी मेहनत की कमाई लूटी जा रही है।
  • पॉश इलाके यहां बड़ा खेल' होता है, जहां मोटी रकम के बदले बड़े व्यावसायिक परिसरों और अवैध निर्माणों को संरक्षण दिया जाता है।
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