

Maharashtra Transport Policy: राज्य सरकार ने राज्य में ऐप आधारित यात्री परिवहन सेवाओं (जैसे ओला, उबर व रैपिडो) को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और नियमबद्ध बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया है कि राज्य में संचालित सभी एग्रीगेटर कंपनियों को 1 सितंबर 2026 तक परिवहन विभाग में अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। निर्धारित समय सीमा के बाद बिना पंजीकरण या नियमों के विपरीत यात्री परिवहन करने वाली कंपनियों और उनसे जुड़े वाहनों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राज्य में ओला, उबर व रैपिडो सहित अन्य ऐप आधारित यात्री परिवहन सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है और प्रतिदिन लाखों लोग इन सेवाओं का उपयोग करते हैं। ऐसे में सरकार यात्रियों की सुरक्षा, सेवा की गुणवत्ता और कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दे रही है। परिवहन विभाग का मानना है कि नई एग्रीगेटर नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से अवैध यात्री परिवहन पर रोक लगाने के साथ-साथ यात्रियों को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि तकनीक के माध्यम से नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन सुविधा के नाम पर कानून की अनदेखी कर यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार एग्रीगेटर व्यवसाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसका उद्देश्य इस क्षेत्र को स्पष्ट नियमों और जवाबदेही के दायरे में लाना है।
नई एग्रीगेटर नीति 2026 के तहत प्रत्येक एग्रीगेटर कंपनी का परिवहन विभाग में पंजीकरण अनिवार्य होगा। कंपनियों से जुड़े सभी वाहनों के पास वैध परमिट, वैध पंजीकरण और आवश्यक दस्तावेज होना जरूरी रहेगा। यात्री परिवहन के लिए उपयोग की जाने वाली बाइक, ऑटो-रिक्शा और कैब का व्यावसायिक वाहन के रूप में पंजीकृत होना अनिवार्य किया गया है।
बिना वैध एग्रीगेटर लाइसेंस के निजी अथवा अन्य वाहनों से व्यावसायिक यात्री परिवहन की अनुमति नहीं होगी। सरकार ने वाहनों के लिए आवश्यक बीमा सुरक्षा को भी अनिवार्य बनाया है। मंत्री सरनाईक ने सभी एग्रीगेटर कंपनियों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि की प्रतीक्षा किए बिना आवश्यक दस्तावेजों के साथ जल्द से जल्द पंजीकरण
की प्रक्रिया पूरी करें। उन्होंने दोहराया कि 1 सितंबर के बाद यदि कोई कंपनी या वाहन अवैध रूप से यात्री परिवहन करते पाया गया तो उसके खिलाफ बिना किसी रियायत के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।