नागपुर में अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट सख्त, मनपा को कार्रवाई के आदेश वाले फैसले में सुधार अर्जी पर नोटिस जारी

Nagpur High Court: वर्धमाननगर में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। आदेश में संशोधन की मांग वाली अर्जी पर कोर्ट ने मूल याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी किया।
The High Court issued a notice regarding an amendment plea over its earlier order directing NMC to demolish an illegal construction within 6 weeks in Nagpur's Vardhaman Nagar.
हाई कोर्ट (सोर्स - सोशल मीडिया)
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Nagpur Bench of the Bombay High Court Illegal Construction: वर्धमाननगर कॉलोनी निवासी राजकुमार श्यामसुंदर खुराना द्वारा किए गए अवैध निर्माण के खिलाफ महानगरपालिका के लकड़गंज जोन में शिकायत की गई थी। हालांकि शिकायत के आधार पर लकड़गंज जोन के सहायक आयुक्त की ओर से एमआरटीपी एक्ट की धारा 53 (1) के तहत नोटिस तो जारी किया गया किंतु कार्रवाई नहीं होने के कारण नंदकिशोर खुराना ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई के बाद 4 मई को हाई कोर्ट ने आदेश का पालन न करने और अवैध निर्माण पर कार्रवाई में ढिलाई बरतने पर महानगरपालिका के प्रति कड़ा रुख अपनाया।

कोर्ट ने महानगरपालिका को अंतिम अवसर देते हुए 6 सप्ताह के भीतर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था। अब 4 मई के आदेश में संशोधन की मांग करते हुए राजकुमार खुराना ने अर्जी दायर की जिस पर सुनवाई के बाद अब हाई कोर्ट ने मूल याचिकाकर्ता नंदकिशोर खुराना, सुरेश रामचंद्र खुराना और धीरज रवीन्द्र खुराना को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने बताई थी महानगरपालिका की लापरवाही

4 मई के आदेश में कोर्ट ने कहा था कि सहायक आयुक्त ने 16 फरवरी 2026 को एक आदेश पारित किया था जिसमें यह निष्कर्ष निकाला गया था कि किया गया निर्माण अवैध है। नागपुर महानगरपालिका ने प्रतिवादी को 15 दिनों के भीतर इस अवैध निर्माण को हटाने का निर्देश दिया था। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि 15 दिनों में निर्माण नहीं हटाया गया तो महानगरपालिका स्वयं इसे ध्वस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

याचिकाकर्ताओं नंदकिशोर एवं अन्य के वकील ने अदालत को बताया था कि 16 फरवरी 2026 का आदेश संबंधित पक्ष को तामील होने के बावजूद 2 महीने से अधिक समय बीत जाने पर भी न तो निर्माण करने वाले ने उसे हटाया और न ही महानगरपालिका के अधिकारियों ने अपने ही आदेश का पालन कराने के लिए कोई कदम उठाया।

अधिकारियों को आखिरी मौका

प्रशासन की इस निष्क्रयता को देखते हुए याचिकाकर्ताओं ने 11 मार्च, 2 अप्रैल, 6 अप्रैल और 15 अप्रैल 2026 को महानगरपालिका को लिखित निवेदन भी दिए लेकिन अधिकारियों ने इन पर कोई ध्यान नहीं दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने कहा था कि अदालत महानगरपालिका के अधिकारियों को उनके वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन में विफलता और आदेशों की अवहेलना के लिए 'कारण बताओ नोटिस' जारी करने ही वाली थी। हालांकि कोर्ट ने अधिकारियों को एक आखिरी मौका देने का फैसला किया था। अब मूल याचिका के प्रतिवादियों ने अर्जी दायर कर इस आदेश में सुधार की मांग की है।

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