Middle East Crisis Impact On India: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के साथ-साथ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Hormuz Strait) पर मंडराते खतरे पर पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल अरुण साहनी ने नवभारत लाइव के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत की। उन्होंने बताया कि इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू अपने राजनीतिक फायदों की वजह से युद्ध को लंबा खींचना चाहते हैं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की प्राथमिकताओं में अभी भी विरोधाभास है। साहनी के अनुसार, इस संघर्ष का सीधा असर भारत पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी 60-70% कच्चे तेल की जरूरतों के आयात पर निर्भर है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन है।
जनरल साहनी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यूक्रेन और मिडिल ईस्ट का युद्ध एक साथ जुड़ गया तो यह प्रथम विश्व युद्ध जैसी भयानक स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने बताया कि भारत अपनी स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी और कूटनीति के जरिए अभी तक खुद को सुरक्षित बनाए रखने में सफल रहा है, लेकिन लंबे समय तक तनाव रहने से देश के आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
जनरल साहनी ने बताया कि इस बीच चीन ने अपनी 'ट्रस्टवर्दीनेस' (विश्वसनीयता) इमेज पर काम किया है, जिससे कई देश अब अमेरिका के बजाय चीन को तकनीक के रूप में एक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं, जो कि चीन के लिए एक रणनीतिक फायदा है।