'एनिमल' विवाद पर दीपिका चिखलिया ने किया रणबीर कपूर का सपोर्ट, साई पल्लवी को लेकर कही ये बात

Deepika Chikhalia On Ranbir Kapoor: रामायण शो की फेमस एक्ट्रेस दीपिका चिखलिया ने रणबीर कपूर की एनिमल विवाद पर रिएक्शन देते हुए फिल्म 'रामायण' में साई पल्लवी की कास्टिंग का भी खुलकर सपोर्ट किया।
Deepika Chikhalia On Ramayana
दीपिका चिखलिया और रणबीर कपूर (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Deepika Chikhalia On Ramayana: नितेश तिवारी के डायरेक्शन में बन रही फिल्म 'रामायण' को लेकर दर्शकों और मीडिया में लगातार चर्चा बनी हुई है। श्रीराम के रोल के लिए रणबीर कपूर और माता सीता के रूप में साई पल्लवी की जोड़ी को लेकर फैंस के बीच उत्सुकता के साथ-साथ कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं। खासतौर पर फिल्म एनिमल में रणबीर कपूर की विवादास्पद भूमिका के बाद, कुछ लोग उन्हें इस धार्मिक चरित्र में स्वीकार करने पर संशय जता रहे थे। इस बीच, 90 के दशक के फेमस टीवी धारावाहिक रामायण में माता सीता का कालजयी एक्टिंग करने वाली एक्ट्रेस दीपिका चिखलिया ने इस पूरे मामले पर अपनी राय सामने रखकर सभी को चौंका दिया है।

रणबीर कपूर की पिछली फिल्म एनिमल में दिखाए गए आक्रामक और हिंसक रोल की वजह से उन्हें काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी। इसी संदर्भ में जब दीपिका चिखलिया से पूछा गया कि क्या ऐसे रोल के बाद श्रीराम की भूमिका निभाना सही है, तो उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में रणबीर का पक्ष लिया। उन्होंने साफ किया कि एक कुशल कलाकार का काम विभिन्न प्रकार के किरदारों में ढलना होता है। एनिमल एक काल्पनिक और हिंसक फिल्म थी, जिसे पेशेवर एक्टिंग का हिस्सा मानकर देखना चाहिए। किसी पुरानी फिल्म के नेगेटिव रोल के आधार पर किसी एक्टर की योग्यता या उसके अगले धार्मिक प्रोजेक्ट का मूल्यांकन करना उचित नहीं है।

साई पल्लवी के चुनाव पर जताई खुशी

फिल्म 'रामायण' में माता सीता के रोल के लिए साउथ एक्ट्रेस साई पल्लवी के चयन पर दीपिका चिखलिया ने बेहद पॉजिटिव रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा कि साई पल्लवी की स्वाभाविक सादगी, बिना किसी बनावट वाली खूबसूरती और उनकी बेहतरीन अभिनय क्षमता इस ऐतिहासिक किरदार के लिए बेहद सटीक बैठती है।

उनके अनुसार, भारतीय दर्शक किसी भी पौराणिक कहानी से तभी जुड़ पाते हैं जब उसमें सादगी और पवित्रता का अहसास हो। साई पल्लवी के चेहरे पर वह सौम्यता और गरिमा साफ दिखाई देती है, जो बड़े पर्दे पर सीताजी के व्यक्तित्व को पूरी तरह जीवंत करने में मददगार साबित होगी।

पौराणिक कहानियों के प्रति दर्शकों की बढ़ीं उम्मीदें

रामायण जैसे महान महाकाव्य को दोबारा बड़े पर्दे पर पेश करना पूरी टीम के लिए एक बहुत बड़ी नैतिक और कलात्मक जिम्मेदारी होती है। दीपिका चिखलिया ने माना कि आज के आधुनिक दौर में भी भारतीय दर्शक अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहरे जुड़े हुए हैं।

यही वजह है कि जब भी 'रामायण' जैसी फिल्में बनती हैं, तो लोगों की भावनाएं और उम्मीदें चरम पर होती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि नितेश तिवारी का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com