
Nagpur Municipal Corporation (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nagpur Municipal Corporation: नागपुर महानगरपालिका के नौ वर्षों बाद हुए आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को भले ही भारी बहुमत मिला हो, लेकिन गुट नेता के चयन को लेकर वरिष्ठ पार्षदों और उनके आकाओं के बीच चल रही खींचतान के कारण नियमों के तहत विभागीय आयुक्त कार्यालय में आवश्यक पंजीयन अब तक नहीं हो पाया है।
उल्लेखनीय है कि चुनाव अधिकारियों द्वारा जीतने वाले सभी सदस्यों को प्रमाणपत्र प्रदान करने के साथ-साथ विभागीय आयुक्त कार्यालय में पंजीयन कराने संबंधी सूचना पत्र जारी किया गया है। हालांकि नियमों के अनुसार जब तक राजनीतिक दल अपने गुट नेता का निर्धारण नहीं करते, तब तक पंजीयन की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती। इसी कारण यह मामला अब कुछ दिनों के लिए अटकने की संभावना है।
महानगरपालिका चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सदन में शक्ति प्रदर्शन और ‘महापौर’ तथा अन्य महत्वपूर्ण पदों के चुनाव के लिए विभागीय आयुक्त कार्यालय में ‘गुट’ अथवा ‘आघाड़ी’ का पंजीयन एक अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया है।
इसी को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने निर्णय लिया है कि गुरुवार को होने वाली महापौर पद की आरक्षण लॉटरी के बाद ही आघाड़ी अथवा गुट नेता का चयन किया जाएगा। बताया जा रहा है कि आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद नागपुर महानगरपालिका के महापौर पद के उम्मीदवार का चयन किया जाएगा, जिसके लिए भाजपा की पार्लियामेंट्री बोर्ड बैठक होने की संभावना है। इसी बैठक में विभिन्न पदों पर निर्णय लेकर गुट नेता के नेतृत्व में पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
जानकारी के अनुसार जहां एक ओर भाजपा में गुट नेता चयन को लेकर गतिरोध बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में भी इस विषय पर मंथन जारी है। पूर्व कार्यकाल में गुट नेता चयन के बाद विपक्ष नेता के पद को लेकर कांग्रेस में काफी रस्साकसी देखने को मिली थी।
उस समय गुट नेता बनने के बाद पूरे पांच वर्षों तक एक ही नेता के पास अधिकार केंद्रित रहे थे। जबकि कांग्रेस का इरादा था कि निश्चित अंतराल पर अलग-अलग सदस्यों को विपक्ष नेता बनाया जाए। गुट नेता के पंजीयन के बाद यह संभव नहीं हो पाया, जिससे पार्टी अब इस बार बेहद सतर्कता के साथ कदम रख रही है।
नियमों के अनुसार दस्तावेजों की जांच और भौतिक सत्यापन के बाद विभागीय आयुक्त कार्यालय संबंधित गुट को एक पंजीकरण संख्या आवंटित करता है। यह पंजीकरण आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनता है।
इसी पंजीकरण के आधार पर सदन में बैठने की व्यवस्था और व्हिप जारी करने का अधिकार तय होता है। महापौर चुनाव के दौरान केवल पंजीकृत गुट का नेता ही अपने सदस्यों को मतदान के लिए आधिकारिक व्हिप जारी कर सकता है। यदि कोई सदस्य गुट के आदेश के विरुद्ध मतदान करता है तो उसकी सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया भी इसी पंजीकरण के आधार पर शुरू होती है।
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किस दल के पास कितने सदस्य हैं, इसका आधिकारिक आंकड़ा विभागीय आयुक्त कार्यालय के पंजीकरण से ही स्पष्ट होता है। चूंकि नौ वर्षों बाद चुनाव हुए हैं, इसलिए कुछ छोटे दल मिलकर नई ‘आघाड़ी’ बनाने का प्रयास कर सकते हैं, जिसके लिए चुनाव परिणाम घोषित होने के सात दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
सूत्रों के अनुसार 23 या 24 जनवरी को राजनीतिक दलों के पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना जताई जा रही है।






