सिवेज ट्रीटमेंट की फर्जी कंपनी में ठाणे मनपा का करोड़ों रुपया, गलत तरीके से बिलों की वसूली

TMC Corruption Allegation: ठाणे नगर निगम में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के ठेके से जुड़ा कथित घोटाला सामने आया है, जिसमें फर्जी कंपनी बनाकर करोड़ों रुपये के बिल वसूलने का आरोप लगाया गया है।
ठाणे सिविक स्कैम, नगर निगम जांच मांग, Thane Municipal Corporation scam
sewage treatment plant contract (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Thane Municipal Corporation Scam: ठाणे मनपा (टीएमसी) में एक चौंकाने वाले कथित घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि मनपा क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का ठेका लेने वाली कंपनी ने एक दूसरी फर्जी कंपनी बनाकर ठाणे मनपा से करोड़ों रुपये बिल के रूप में वसूल लिए। यह आरोप लगाते हुए भाजपा के नगरसेवक मनोहर डुंबरे ने टीएमसी आयुक्त सौरभ राव से पूरे मामले की जांच की मांग की है।

बीजेपी के वरिष्ठ नगरसेवक का आरोप है कि यह फर्जीवाड़ा कई वर्षों से चल रहा है, लेकिन अब तक कॉन्ट्रैक्टर और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने हैरानी जताई कि जिस फर्जी ठेकेदार पर आरोप हैं, उसे ही छह सीवेज ट्रीटमेंट सेंटर का नया काम देने की प्रक्रिया चल रही है।

कई वर्षों से चल रहा फर्जीवाड़ा

ठाणे मनपा ने सीवेज ट्रीटमेंट सेंटर और कोविड अस्पताल के सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम के ऑपरेशन, केयर, मेंटेनेंस और रिपेयर का ठेका मेसर्स ए.के. इलेक्ट्रिकल एंड वर्क्स को दिया था। नगरसेवक के पत्र के अनुसार इस कंपनी का जीएसटी नंबर 27ALNPKO315N1ZW और पैन नंबर ALNPKO315N है। यह प्रोप्राइटरशिप कंपनी है, जिसके मालिक अशोक केडासे बताए गए हैं और उनका पता नवी मुंबई का है।

बीजेपी नगरसेवक ने की जांच की मांग

बताया गया कि कंपनी का जीएसटी पंजीकरण 1 जुलाई 2017 को हुआ था और उसी अनुभव के आधार पर उसे टेंडर मिला। शुरुआत में मनपा द्वारा इस कंपनी के विजया बैंक खाते में भुगतान किया गया, लेकिन कुछ महीनों बाद ठेकेदार ने एम.ए.के. इलेक्ट्रिकल एंड वर्क्स नाम से दूसरी कंपनी बनाकर उसी टेंडर अवधि के दौरान उसी काम के बिल उस फर्जी कंपनी के नाम से लेना शुरू कर दिया।

कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं

बताया गया कि नई कंपनी पार्टनरशिप फर्म है, जिसका जीएसटी नंबर 27ABTFA7505Q1ZM और पैन नंबर ABTFA7505Q है। दोनों कंपनियों के बैंक खाते भी अलग-अलग थे। नगरसेवक का आरोप है कि 3 नवंबर 2021 को इस मामले का खुलासा होने के बावजूद ठेकेदार के खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की गई और न ही उसे ब्लैकलिस्ट किया गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में मनपा के मैकेनिकल विभाग के एक डिप्टी इंजीनियर का संरक्षण प्राप्त है। नगरसेवक मनोहर डुंबरे ने कहा कि मनपा को कथित तौर पर धोखा देने वाले ठेकेदार को फिर से 38 करोड़ रुपये के ठेके पर 10 साल के लिए छह सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम दिया जा रहा है।

सीवेज वाटर की जगह सोलर से बिजली उत्पादन

मनोहर डुंबरे ने यह भी आरोप लगाया कि कोपरी स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में सीवेज के पानी से बिजली उत्पादन के नाम पर मनपा ने लगभग 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया। जबकि वहां वास्तव में सोलर सिस्टम का उपयोग कर बिजली बनाई गई। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट से मनपा को तय 10 प्रतिशत रॉयल्टी भी कभी प्राप्त नहीं हुई।

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