
Amravati News: अमरावती मनपा चुनाव के परिणाम शुक्रवार को घोषित होते ही शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हालांकि किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है, लेकिन अब चुनाव के बाद की राजनीति और महापौर पद को लेकर गुप्त लॉबिंग और रणनीतियों का खेल शुरू हो गया है। महापौर पद के आरक्षण की घोषणा के साथ ही इसके लिए जमकर लॉबिंग चल रही है।
चुनाव परिणाम के बाद नगरसेवक अपने-अपने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर आगे की रणनीति तय कर रहे हैं। खासकर अल्पसंख्यक वर्ग के चुने हुए नगरसेवकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि वे किसके साथ जाएंगे और किसे साथ लेंगे। इस बीच भाजपा ने 51 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था और इसके लिए 68 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था।
हालांकि भाजपा को महज 25 सीटें ही मिल पाईं, फिर भी पार्टी ने सबसे अधिक सीटें जीतकर सत्ता की राह में अग्रणी होने का दावा किया है। सभी दलों को झटका भाजपा के अलावा सभी दलों ने बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। इनमें कांग्रेस ने 74 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे।
इसके अलावा युवा स्वाभिमान ने 33, शिंदे गुट ने 72, राष्ट्रवादी अजीत पवार गुट ने 85, उबाठा ने 41, राष्ट्रवादी शरद पवार गुट ने 19, और एमआईएम, बसपा, वंचित, समाजवादी पार्टी ने भी जोरदार तैयारी की थी। हालांकि, परिणामों के बाद इन सभी दलों को अपेक्षाकृत कम सफलता मिली है।
खासकर राष्ट्रवादी कांग्रेस के शरद पवार गुट को एक भी सीट नहीं मिली, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार भी अपना खाता खोलने में नाकाम रहे। चुनाव के बाद का खेल तेज अमरावती महानगरपालिका चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या अधिक थी, लेकिन विजयी उम्मीदवारों की संख्या सीमित रहने के कारण चुनाव से ज्यादा चुनाव के बाद की राजनीति अधिक रोचक हो सकती है।
अब महापौर पद की घोषणा और उसके बाद की राजनीतिक घटनाओं पर पूरा शहर की नजरें टिकी हुई हैं। इस समय नगरसेवक विजय के उत्सव में व्यस्त हैं, लेकिन पर्दे के पीछे सत्ता की खींचतान तेज हो गई है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा हो रही है कि महापौर पद भाजपा के पास जाने की संभावना अधिक है, लेकिन आरक्षण, संभावित गठबंधन और संख्याबल के आधार पर अंतिम तस्वीर तय होगी।
चुनाव परिणाम के बाद अब सभी की नजरें महापौर पद पर टिक गई हैं। आरक्षण की घोषणा का इंतजार करते हुए, महापौर पद के लिए पर्दे के पीछे तेजी से हलचलों का दौर चल रहा है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, सबसे अधिक सीटें मिलने के कारण भाजपा को स्वाभाविक रूप से आघाड़ी माना जा रहा है, लेकिन आरक्षण, गठबंधन और संख्याबल पर निर्भर करेगा कि महापौर पद कौन हासिल करेगा।
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सत्ता स्थापना के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी चालें तेज कर दी हैं। महिलाओं का दबदबा मनपा चुनाव में महिलाओं ने स्पष्ट रूप से अपना दबदबा स्थापित किया है। 22 प्रभागों में से 87 सीटों पर 45 महिला नगरसेविकाओं ने जीत दर्ज की है, जिससे महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक हो गई है।
महिलाओं के लिए 44 सीटें आरक्षित होने के बावजूद, एक सीट पर अधिक महिलाओं के जीतने से महिलाराज का दृश्य बन रहा है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग की महिलाओं ने भी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। खासकर शहर के तीन प्रभागों में तीनतीन महिला नगरसेविकाओं की जीत ने यह संकेत दिया है कि महिलाएं आगामी समय में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।






