बजट सत्र में घमासान: नरहरि जिरवाल के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष, सीढ़ियों पर गूंजा 'भ्रष्ट सरकार' का नारा

Narhari Zirwal Resignation Demand MVA Protest: महाराष्ट्र बजट सत्र: MVA ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मंत्री नरहरि जिरवाल का इस्तीफा मांगा। रिश्वतखोरी के आरोप में क्लर्क की गिरफ्तारी के बाद हंगामा।
Narhari Zirwal Resignation Demand MVA Protest
Narhari Zirwal Resignation Demand MVA Protest (फोटो क्रेडिट-X)
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Maharashtra Budget Session 2026: महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा दिन आज विपक्ष के भारी हंगामे और भ्रष्टाचार के आरोपों की भेंट चढ़ता दिख रहा है। महाविकास अघाड़ी (MVA) के विधायकों ने सदन की सीढ़ियों पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री नरहरि जिरवाल के इस्तीफे की मांग की। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए नारा दिया कि "भ्रष्ट मंत्रियों का साथ देने वाली सरकार को धिक्कार है।"

विपक्ष का आरोप है कि मंत्रालय अब भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है, जहाँ जनता की फाइलें बिना 'सुविधा शुल्क' के आगे नहीं बढ़तीं। इस दौरान प्रदर्शनकारी विधायकों ने "मंत्रालय चलता है तनख्वाह से, फाइलें चलती हैं पैसे से" जैसे नारों के साथ महायुति सरकार की घेराबंदी की।

नरहरि जिरवाल के कार्यालय में 'भ्रष्टाचार' का मामला

विपक्ष के इस आक्रोश की मुख्य वजह हाल ही में मंत्री नरहरि जिरवाल के कार्यालय से जुड़ी एक घटना है। दरअसल, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जिरवाल के कार्यालय में कार्यरत एक क्लर्क को 35,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। आरोपी क्लर्क ने कथित तौर पर बयान दिया था कि उसने यह रिश्वत अपने वरिष्ठों के कहने पर ली थी। इसी कड़ी में मंत्री के निजी सचिव (PA) रामदास गाडे पर भी कार्रवाई की गई है, जिससे विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मुद्दा मिल गया है।

सीढ़ियों पर प्रदर्शन और 'पैसे से चलती फाइलें' के नारे

बजट सत्र के दूसरे दिन विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक विधान भवन की सीढ़ियों पर जमा हो गए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार केवल निचले स्तर पर नहीं, बल्कि मंत्रियों के केबिन तक पहुँच चुका है। नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि जब तक नरहरि जिरवाल इस्तीफा नहीं देते, तब तक निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। विपक्षी नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि महायुति सरकार में ईमानदारी की कीमत महज कुछ हजार रुपये रह गई है।

सरकार का बचाव और सीएम फडणवीस का जवाब

विपक्ष के इन आरोपों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकार का बचाव किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी सरकार 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाती है और इसीलिए ACB को खुली छूट दी गई है। फडणवीस ने कहा कि "सिर्फ इसलिए कि किसी क्लर्क ने मंत्री के केबिन में गलत काम किया, बिना ठोस सबूत के मंत्री को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब तक की जांच में मंत्री नरहरि जिरवाल की कोई सीधी भूमिका सामने नहीं आई है। हालांकि, विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं है और उसने चर्चा की मांग को लेकर सदन में हंगामा जारी रखा है।

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