शव के साथ छत पर घंटों बैठा रहा परिवार, पालघर की भारी बारिश के कारण कष्टकारी हुआ बुजुर्ग का अंतिम संस्कार

Palghar Devipada Floods Woman Funeral Delay: पालघर के देवीपाड़ा में बाढ़ के पानी के चलते एक परिवार को बुजुर्ग महिला के शव के साथ 4 घंटे तक छत पर बैठना पड़ा।
Dead Body On Roof Palghar Heavy Rain
शव के साथ छत पर बैठा परिवार (फोटो क्रेडिट-X)
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Dead Body On Roof Palghar Heavy Rain: महाराष्ट्र के तटीय जिले पालघर में मानसून की भारी बारिश और उसके बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने आम जनजीवन को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। कुदरत के इस कहर के बीच केल्वे रोड क्षेत्र के देवीपाड़ा गांव से एक ऐसी दिल दहला देने वाली और कष्टकारी घटना सामने आई है, जिसने मानवीय बेबसी की सारी हदें पार कर दी हैं।

गांव में बाढ़ का पानी घरों के भीतर तक घुस जाने के कारण एक शोकाकुल परिवार को अपने घर के बुजुर्ग सदस्य के शव को सुरक्षित रखने के लिए उसे कंधे पर उठाकर घर की छत पर जाना पड़ा। यह लाचार परिवार भारी बारिश के बीच करीब चार घंटे तक अपनी मां की लाश के साथ छत पर बैठकर पानी उतरने का इंतजार करता रहा। इस झकझोर देने वाली घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे महाराष्ट्र में शोक और आक्रोश की लहर है।

अस्पताल में हुई मौत, रेलवे अंडरपास ने रोकी राह

पालघर में देवीपाड़ा की रहने वाली 55 वर्षीय अनुसया मनोहर लिल्का पिछले कुछ समय से बीमार थीं और धुंधालवाड़ी के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। रविवार रात इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। सोमवार सुबह जब परिजन बेहद गमगीन माहौल में उनके शव को एम्बुलेंस से लेकर केल्वे रोड पहुंचे, तो रास्ते में स्थित रेलवे अंडरपास पूरी तरह से पानी में डूबा हुआ था।

एम्बुलेंस आगे नहीं जा सकती थी, जिसके बाद मजबूर होकर बेटों और रिश्तेदारों ने मां के शव को अपने कंधों पर उठाया और घुटनों तक भरे पानी को पार करते हुए जैसे-तैसे घर तक लाए।

घर में घुसा बाढ़ का पानी, सीमेंट की चादरें तोड़ शव को छत पर ले गए परिजन

परिजनों का संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ। शव के घर पहुंचते ही अचानक मूसलाधार बारिश और तेज हो गई, जिससे पास के नाले का बाढ़ का पानी सीधे उनके रिहायशी मकान में घुस गया। पानी का स्तर इतनी तेजी से बढ़ रहा था कि जमीन पर रखे शव के बह जाने का गंभीर खतरा पैदा हो गया। ऐसी विकट और डरावनी परिस्थिति में परिवार ने अदम्य साहस और सूझबूझ दिखाई।

उन्होंने तुरंत रसोई की छत पर लगी सीमेंट की दो भारी चादरों को कुल्हाड़ी से तोड़ा और वहां से रास्ता बनाकर शव को ऊपरी पक्की छत पर ले गए। इसके बाद, उन्होंने शव को एक बड़ी प्लास्टिक शीट से ढककर तेज बौछारों से बचाने का प्रयास किया।

चार घंटे बाद उतरा पानी, तब हो सका अंतिम संस्कार

छोटे बच्चों सहित परिवार के सभी सदस्य करीब चार घंटे तक भूखे-प्यासे, मुट्ठी भींचे छत के एक कोने में शरण लिए रहे। एक तरफ अपनी मां को खोने का गहरा दुख और दूसरी तरफ नीचे हिलोरे मारता बाढ़ का पानी, इस दोहरे मानसिक और शारीरिक संकट ने लिल्का परिवार को भीतर तक तोड़ कर रख दिया। दोपहर बाद जब बारिश थमी और बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हुआ, तब जाकर शव को नीचे लाया जा सका।

इसके बाद, ग्रामीणों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत गीली लकड़ियों के बीच सूखी लकड़ियों का इंतजाम किया और देवीपाड़ा श्मशान घाट में अनुसया लिल्का का अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।

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