
MNS Petition Dismissed:मुंबई हाईकोर्ट ने बिनविरोध निर्वाचित (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai High Court Verdict: महाराष्ट्र की नगरपालिकाओं के चुनावों में बिनविरोध निर्वाचित हुए नगरसेवकों के खिलाफ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) द्वारा दायर याचिका को मुंबई हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसे मनसे की कानूनी रणनीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। मनसे नेता अविनाश जाधव ने राज्यभर की नगरपालिकाओं में बिनविरोध निर्वाचित हुए नगरसेवकों के खिलाफ यह याचिका दायर की थी। याचिका में मांग की गई थी कि बिनविरोध चुने गए नगरसेवकों पर रोक लगाई जाए और सुनवाई पूरी होने तक यह रोक जारी रखी जाए।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब बिनविरोध निर्वाचित सभी नगरसेवक अपने पदों पर बने रहेंगे और नगरपालिका चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेंगे। जाधव की याचिका पर तत्काल सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने बुधवार को इसे खारिज कर दिया। चुनावी माहौल के मद्देनजर इस फैसले को मनसे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
अविनाश जाधव ने अपनी याचिका में सवाल उठाया था कि नगरसेवक बिनविरोध कैसे चुने जा सकते हैं, जबकि मतदान प्रक्रिया में ‘नोटा’ का विकल्प उपलब्ध है। याचिका में यह तर्क दिया गया था कि जब नोटा मौजूद है, तो निर्विरोध निर्वाचन की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।
राज्य की नगरपालिका चुनावों में 66 से अधिक नगरसेवक बिनविरोध निर्वाचित हुए हैं। इनमें सत्तारूढ़ महायुति के प्रमुख घटक भाजपा के सर्वाधिक 44 उम्मीदवार शामिल हैं। इसके बाद एकनाथ शिंदे की शिवसेना के 22 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं।
कल्याण-डोंबिवली नगरपालिका में भाजपा के 15 और शिवसेना (शिंदे गुट) के 7 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। इसके अलावा अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 2 उम्मीदवार, मालेगांव से इस्लाम पार्टी का एक उम्मीदवार और एक निर्दलीय उम्मीदवार भी बिनविरोध विजयी हुए हैं।
राज ठाकरे ने लगाए थे गंभीर आरोप
बिनविरोध चुनावों को लेकर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी तीखा हमला बोला था। ठाणे में आयोजित एक सभा में उन्होंने दावा किया था कि बिनविरोध निर्वाचन के लिए 1 से 15 करोड़ रुपये तक के प्रस्ताव दिए गए। उन्होंने कहा था कि मनसे के उम्मीदवारों को भी बिनविरोध होने के लिए बड़े प्रस्ताव मिले थे।
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शैलेश धात्रक और उनके परिवार के तीन सदस्यों को एक साथ 15 करोड़ रुपये का प्रस्ताव मिला था, जबकि राजश्री नाईक को 5 करोड़ रुपये और सुशील आवटे को 1 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी, लेकिन सभी ने इसे ठुकरा दिया। राज ठाकरे ने सवाल उठाते हुए कहा था, “यह महाराष्ट्र में कैसा चुनाव हो रहा है? कहीं 15 करोड़ रुपये की पेशकश ठुकराई जा रही है और कहीं पांच-पांच हजार रुपये में वोट बेचे जा रहे हैं।”






