मुंबई फेरीवालों पर दोहरी मार, PM स्वनिधि योजना से लिया कर्ज, अब व्यवसाय करने की जगह पर संकट

Mumbai News: मुंबई में करीब 1.10 लाख फेरीवालों ने पीएम स्वनिधि योजना से कर्ज लिया है, लेकिन वैध व्यवसायिक जगह न मिलने से वे लोन चुकाने में असमर्थ हो रहे हैं। यह योजना फेरिवालों के लिए परेशानी बन गई है
मुंबई फेरीवाले (pic credit; social media)
मुंबई फेरीवाले (pic credit; social media)
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Maharashtra News: प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का उद्देश्य फेरीवालों को आत्मनिर्भर बनाना था, लेकिन मुंबई के हजारों फेरीवालों के लिए यह अब जी का जंजाल साबित हो रहा है। हॉकर्स यूनियनों का दावा है कि शहर में करीब 1 लाख 10 हजार फेरीवालों ने इस योजना से कर्ज लिया है, लेकिन अब उनके सामने कर्ज चुकाने और व्यवसाय करने दोनों का संकट खड़ा हो गया है।

केंद्र सरकार ने हाल ही में पीएम स्वनिधि योजना के पुनर्गठन और विस्तार को मंजूरी दी है। 7,332 करोड़ रुपये के बजट के साथ यह योजना अब 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी। पहली किश्त की ऋण सीमा 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार, दूसरी किश्त 20 हजार से बढ़ाकर 25 हजार और तीसरी किश्त 50 हजार रुपये रखी गई है। इस योजना का लक्ष्य 50 लाख नए फेरीवालों सहित 1.15 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंचना है।

मुंबई हॉकर्स यूनियनों का कहना है कि सरकार केवल लोन बांट रही है, लेकिन असली मुद्दा—फेरीवालों को वैध व्यवसाय करने की जगह—अब भी अनसुलझा है। 2014 में बीएमसी ने 1.28 लाख फेरीवालों का सर्वे किया था। इसके बाद करीब 99 हजार आवेदनों में से 32 हजार फेरीवालों को अधिकृत माना गया। लेकिन पात्र फेरीवालों को जगह आबंटित करने का मामला अब तक कोर्ट में लंबित है।

यूनियनों का आरोप है कि बीएमसी और रेलवे प्रशासन, हाईकोर्ट की फटकार के बाद फेरीवालों को सड़कों और फुटपाथों से हटाने की कार्रवाई तेज कर रहे हैं। इस वजह से बोरीवली, कांदिवली, अंधेरी, दादर, कुर्ला और जोगेश्वरी जैसे इलाकों में फेरीवाले नजर नहीं आ रहे। सवाल यह है कि जब फेरीवालों को सरकार की योजना के तहत लोन दिया गया है, तो फिर उन्हें व्यवसाय से कैसे रोका जा सकता है।

हॉकर्स नेताओं का कहना है कि कई फेरीवाले आज भूखमरी के कगार पर हैं। उनकी पूरी आजीविका फेरी व्यवसाय पर निर्भर है, ऐसे में या तो सरकार उन्हें वैध जगह उपलब्ध कराए या फिर लिया गया कर्ज माफ करे।

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