'विजन जालना 2030' पर मंथन, नागरिकों की भागीदारी से बदलाव संभव, जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन पर हुई गहन

"Vision Jalna 2030": जालना में 'व्हेयर आइडियाज बिकम एक्शन' परिषद में पर्यावरण और शहरी विकास पर गहन चर्चा हुई। जालना मनपा आयुक्त श्रीकांत और अन्य अधिकारियों ने विकास के लिए नागरिकों से अपील की।
Vision Jalna 2030 जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन पर हुई गहन
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Urban Development Hindi News: छत्रपति संभाजीनगर मनपा आयुक्त जी. श्रीकांत ने कहा कि जिस परिवार की मुखिया महिला होती है, उस परिवार का विकास तेजी से होता है। जालना में भी जिलाधिकारी अशिमा मित्तल और जिप की सीईओ मिन्नू पी.एम. दोनों महिलाएं हैं, जो जमीनी स्तर पर समस्याओं से जूझते हुए समाधान की दिशा में कार्य कर रही हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे प्रशासन की तलवार की धार बनें।

संपर्क, संवाद व समाधान के बिना विकास असंभव है। अधिकारी आते-जाते रहते हैं, पर शहर के विकास की निरंतर जिम्मेदारी नागरिकों की ही होती है। जिला प्रशासन, मनपा व जालना फर्स्ट की ओर से 17 दिसंबर को होटल में आयोजित 'व्हेयर आइडियाज बिकम एक्शन' मंथन परिषद में देश के जाने-माने पर्यावरण, जल संरक्षण व शहरी विकास विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि अब विचार नहीं, ठोस क्रियान्वयन का समय है।

स्वच्छता, सीवेज वॉटर ट्रीटमेंट व कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर चार घंटे तक चले इस गहन विमर्श ने 'विजन जालना 2030' को न केवल दिशा दी, बल्कि प्रशासन, सामाजिक संगठनों व नागरिकों की साझी भागीदारी से शहर में बड़े बदलाव की उम्मीद भी जगा दी।

शहर के भविष्य का रोडमैप तैयार किया गया। शुरुआत मनपा के अतिरिक्त आयुक्त अर्जुन गिराम ने वृक्ष पूजन से की। पहले सत्र में स्त्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण, कचरा संग्रहण व ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली पर विस्तृत चर्चा हुई।

युवाओं पर कचरे का बोझ न सौंपें : कुलकर्णी

कंसल्टिंग मैनेजिंग में रोजाना 150 टन कचरा उत्पन्न हो रहा है। उचित प्रक्रिया के अभाव में ठोस व तरल कचरे के ढेर लगने से वायु, जल व भूमि प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच रहा है। उन्होंने कचरा प्रबंधन के लिए विचार को क्रियान्वयन में बदलने व इसके लिए नागरिकों से जालना फर्स्ट के साथ समर्पित भाव से जुड़ने की अपील की।

नदियों का जुड़ाव होना जरूरी : डॉ. पांडे

कहा कि दूषित पानी से गंभीर बीमारियां फैलती हैं। उन्होंने कुंडलिका सीना नदी पुनर्जीवन पर कार्य कर रही सेवाभावी संस्थाओं का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि पानी व नदियों का स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़ा होना चाहिए। प्रस्तावना जालना फर्स्ट के अध्यक्ष गोविद गोयल ने रखी। कार्यक्रम में अर्बन प्लानर एवं डिजाइन शाला कोलैबोरेटिव के फाउंडर व प्रिसिपल आर्किटेक्ट आशिक जैन व राजेंद्र जावले ने भी मार्गदर्शन किया शुरुआत में घनश्याम गोयल, संजय अग्रवाल, काजल पटेल, डीबी सोनी, डॉ. अनीता तवरावाला, डॉ. अनुराधा राख व यश भक्कड़ ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन धवल मिश्रीकोटकर ने किया, विनीत पित्ती व रितेश मिश्रा ने आभार माना

प्रशासन का मिलता रहेगा सहयोग : मित्तल

जिलाधिकारी अशिमा मित्तल ने कहा कि जालना फर्स्ट द्वारा की ओर से आयोजित संकल्पनाओं व सकारात्मक प्रयासों को जिला प्रशासन सहयोग देगा। विकास में शहर की सेवाभावी संस्थाएं अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने आगामी चुनावों में अधिक से अधिक मतदान कर लोकतंत्र को सशक्त बनाने की अपील की। आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर ए।के। गोसाइन ने ऑनलाइन कहा कि नदी, जलवायु व शहर एक दूसरे पर निर्भर हैं।

जलवायु परिवर्तन का पड़ रहा सीधा असर

जलवायु परिवर्तन का सीधा असर नदियों के प्रवाह पर पड़ता है, जिसका प्रभाव शहरों की जल आपूर्ति, बाढ़ प्रबंधन व पर्यावरण पर दिखाई देता है। सतत शहरी विकास के लिए नदी प्रबंधन और जलवायु की वैज्ञानिक समझ का समन्वय जरूरी है।

मंत्राज ग्रीन रिसोर्सेज लिमिटेड के चीफ प्रमोटर व चेयरमैन डॉ. यूके शर्मा, इको सत्व की सह-संस्थापक गौरी मिरासे, जिप सीईओ मिन्नू पीएम, एन्वर्सिस ग्रीनटेक सॉल्यूशंस के निदेशक अमोल गजरे ने भी विचार रखे।

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