महाराष्ट्र में टीचर के 20 हजार पद घटेंगे, हाईकोर्ट ने शिक्षक समायोजन की सभी याचिकाएं खारिज की

Maharashtra News: बंबई हाईकोर्ट ने शिक्षक समायोजन विरोधी सभी याचिकाएँ खारिज कीं। सुधारित संचमान्यता के बाद राज्य में 20,000 पद कम होंगे। 5 दिसंबर तक समायोजन प्रक्रिया, ग्रामीण शालाओं पर असर पड़ेगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maharashtra Teacher Adjustment News: बंबई उच्च न्यायालय ने शिक्षक समायोजन से संबंधित सभी याचिकाओं को खारिज कर राज्य सरकार के निर्णय को सही ठहराया है। इसके बाद शिक्षा संचालक ने सुधारित संचमान्यता के अनुसार पूरे राज्य में अतिरिक्त शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया तेज करने के आदेश जारी किए हैं।

नई संचमान्यता लागू होने से लगभग 20,000 शिक्षक पद कम हो जाएंगे, जिससे आने वाले समय में शिक्षक भर्ती की संभावना भी बेहद सीमित होने की आशंका है।

समायोजन प्रक्रिया शुरू

शालेय शिक्षा विभाग ने 15 मार्च 2024 को विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर शिक्षक पदों के पुनर्मूल्यांकन और अतिरिक्त शिक्षकों व शिक्षकेतर कर्मचारियों के समायोजन का शासन निर्णय जारी किया था। इसके तहत वर्ष 2024-25 के लिए स्वीकृत और कार्यरत शिक्षक संख्या पहले ही घोषित की जा चुकी है। हालांकि, महाराष्ट्र राज्य पदवीधर प्राथमिक शिक्षक एवं केंद्र प्रमुख सभा सहित कई संगठनों ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए मुंबई उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की थीं। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान ‘जैसी स्थिति है वैसी बनाए रखने’ का आदेश दिया था, लेकिन 14 नवंबर की सुनवाई में सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।

5 दिसंबर तक जिला स्तर पर समायोजन

हाई कोर्ट के फैसले के बाद प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा संचालक ने तत्काल आदेश जारी कर 15 मार्च 2024 के शासन निर्णय के अनुसार समायोजन प्रक्रिया 5 दिसंबर तक पूर्ण करने को कहा है। यदि किसी जिले में अतिरिक्त शिक्षक शेष रहते हैं, तो उनका समायोजन विभागीय स्तर पर 19 दिसंबर तक किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे राज्य में जिला प्रशासन शिक्षक समायोजन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में जुट गया है।

ग्रामीण स्कूलों पर बड़ा असर

अमरावती के केंद्र प्रमुख प्रसाद पाटिल ने कहा कि नए सुधारित संचमान्यता आदेश में शिक्षक मंजूर करने के लिए विद्यार्थियों की संख्या की सीमा बढ़ा दी गई है। इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों की शालाओं पर पड़ेगा, जहां छात्र संख्या कम होने से 6वीं से 8वीं कक्षा में विषय शिक्षक पद घट जाएंगे और कई शिक्षक अतिरिक्त घोषित होंगे।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने शिक्षण अधिकार कानून को दरकिनार कर अनुचित मापदंड जारी किए हैं। इसका नुकसान ग्रामीण विद्यार्थियों को उठाना पड़ेगा। इसी के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है, जिसकी जल्द सुनवाई कराने के प्रयास जारी हैं।

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