सोशल मीडिया के जरिए दहशत फैलाता लॉरेंस बिश्नोई गैंग, रोहित शेट्टी फायरिंग केस में नए खुलासे

Rohit Shetty Firing Case: मुंबई में रोहित शेट्टी के घर के बाहर फायरिंग केस की जांच में लॉरेंस बिश्नोई गैंग की नई कार्यप्रणाली सामने आई है। सोशल मीडिया और ड्रॉपर मॉडल के जरिए हमले की साजिश रची गई थी।
Lawrence Bishnoi
लॉरेंस बिश्नोई (सौजन्य : सोशल मीडिया)
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Lawrence Bishnoi Gang Attack Strategy: गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का गैंग सोशल मीडिया के कंधे पर सवार होकर खुद को स्थापित कर रहा है और बॉलीवुड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी दहशत फैला रहा है।

बिश्नोई गैंग मुख्य रूप से हाई-प्रोफाइल लोगों को निशाना बनाती है। लेकिन हमले इतनी दूर से किए जाते हैं कि हमलावर की जान को खतरा न हो। वारदात के तुरंत बाद गैंग सोशल मीडिया पर इसकी जिम्मेदारी ले लेती है।

इतना ही नहीं, कथित तौर पर ऑनलाइन डिलीवरी और एनक्रिप्टेड ऐप्स के जरिए हथियार, पैसे, वाहन और निर्देश पहुंचाए जाते हैं, जिससे वारदात को अंजाम देने वाले लोग एक-दूसरे को जानते तक नहीं होते।

यह तरीका गैंग को ट्रेस करना मुश्किल बना देता है और युवाओं को आसानी से भर्ती करने में मदद करता है। बॉलीवुड निर्माता-निर्देशक रोहित शेट्टी के आवास के बाहर हुई गोलीबारी की घटना की मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा, जांच तेज किए जाने के साथ ही एक सुनियोजित और जटिल साजिश के राज खुल रहे हैं।

स्कूटर से पुणे से मुंबई आया

जांचकर्ताओं ने पाया है कि बिश्नोई गिरोह ने इस हमले को इस तरह अंजाम दिया था कि, पुलिस इसमें शामिल सभी लोगों का पता न लगा सके। अब जांच का दायरा बढ़ाकर इसमें रेकी, अवैध हथियार आपूर्ति, वित्तीय सहायता और संभावित अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी शामिल किया गया है। क्राइम ब्रांच के सूत्रों के अनुसार शूटर को न तो सीधे हथियार सौंपा गया और न ही कोई वाहन मुहैया कराया गया। इसके बजाय गिरोह ने रडेड ड्रॉपर मॉडल अपनाया, जिससे शूटर और लॉजिस्टिक्स हँडलर के बीच कोई सीधा संपर्क न हो। कथित मास्टरमाइंड शुभम लोनकर के निर्देशों पर शूटर के लिए स्कूटर की व्यवस्था करने की एक विस्तृत योजना बनाई गई थी। जांच से पता चला है कि गिरफ्तार आरोपी स्वप्निल साकत और सिद्धार्थ येनपुरे स्कूटर लेकर पुणे से मुंबई गए था। लेकिन उनकी मुलाकात शूटर से नहीं हुई।

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