

Gondia-Tiroda Paddy Farmers Bonus Demand: गोंदिया के तिरोड़ा में आधारभूत धान खरीदी केंद्र शुरू हुए, तभी से सरकार धान बिक्री पर बोनस देती आ रही है। 2 वर्ष पूर्व तक किसानों को धान की क्विंटल बिक्री सीमा 50 क्विंटल तक प्रति क्विंटल पर बोनस दिया जाता था। लेकिन अब प्रति हेक्टेयर (ढाई एकड़) तक 20 हजार रुपये, जिसमें एक एकड़ के 8 हजार रुपये शामिल हैं, इसकी सीमा 2 हेक्टेयर यानी 5 एकड़ तक दी जाती है। उससे अधिक की जगह का बोनस नहीं दिया जाता है।
महाराष्ट्र राज्य कृषि मूल्य आयोग ने 4,783 रुपये प्रति क्विंटल भाव दिए जाने की सिफारिश केंद्रीय कृषि मूल्य आयोग, दिल्ली से की थी। जिस पर केंद्रीय कृषि मूल्य आयोग व केंद्र सरकार ने 2,369 रुपये प्रति क्विंटल भाव निश्चित किया है।
यदि एक एकड़ का उदाहरण लिया जाए, जिसमें महाराष्ट्र सरकार के अनुसार 20 क्विंटल धान उत्पादन हुआ, तो उसका 2,369 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से 46,380 रुपये किसान को मिल रहे हैं। यदि राज्य कृषि मूल्य आयोग की सिफारिशी रेट के अनुसार भाव मिलता, तो 95,660 रुपये मिले होते।
इस पर 8 हजार रुपये बोनस, 6 हजार रुपये पीएम किसान, 6 हजार रुपये नमो किसान, इस तरह कुल 20 हजार रुपये भी कम किए जाएं, तब भी 28,280 रुपये कम मिलते हैं। किसान को एक एकड़ में सभी मिलने वाली योजनाओं के रुपये जोड़कर भी 28,280 रुपये का नुकसान हो रहा है। इसलिए राज्य कृषि मूल्य आयोग की सिफारिश के अनुसार भाव दिया जाए, तब बोनस व प्रधान मंत्री किसान जैसी योजना से मिलने वाले रुपयों की आवश्यकता नहीं है। भाव सही मिला, तो बोनस की जरूरत नहीं होगी।
खरीफ धान रोपाई का मौसम शुरू हो गया है। बीजाई का धान, खेत की जुताई, रोपाई, कीचड़ करने के लिए ट्रैक्टर का उपयोग, मजदूरों की मजदूरी, रासायनिक खाद व कीटनाशक दवाइयां आदि के खर्च के लिए किसानों को नकद राशि देनी होती है। लेकिन किसानों की आर्थिक स्थिति दयनीय होने से वे मन मसोसकर रह जाते हैं।
किसानों को प्रति हेक्टेयर पर 20 हजार रुपये बोनस देने की घोषणा सरकार ने की, लेकिन उस अनुसार अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। सरकार के पास पैसों की तंगी है, ऐसी तस्वीर दिखाई दे रही है। ऐसी स्थिति में मंत्री, सांसद व विधायकों को मिलने वाले वेतन व पेंशन रोक दी जानी चाहिए और वह राशि किसानों को बोनस के रूप में दी जानी चाहिए।
धान उत्पादक किसान मुख्य रूप से गोंदिया, भंडारा, नागपुर, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, सिंधुदुर्ग आदि जिलों के ही हैं। सरकार किसानों की इन ज्वलंत समस्याओं का तत्काल निराकरण करे, ऐसी मांग किसानों ने की है।