नागपुर में 'मिशन मुक्ति' के दावे हुए हवा-हवाई; प्रमुख चौराहों पर भिखारियों का जमावड़ा, प्रशासन की अनदेखी जारी

Nagpur Traffic Signals: नागपुर के प्रमुख चौक-चौराहों पर भिखारियों की बढ़ती संख्या से यातायात और सड़क सुरक्षा प्रभावित हो रही है। मिशन मुक्ति अभियान के बावजूद स्थिति में खास सुधार नहीं दिख रहा।
'Mission Mukti' claims in Nagpur prove hollow; beggars congregate at major intersections as administrative apathy persists.
नागपुर, मिशन मुक्ति, भिखारी, ट्रैफिक सिग्नल,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
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Mission Mukti Beggar Rehabilitation: नागपुर शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और ट्रैफिक सिग्नलों पर भिखारियों की बढ़ती संख्या आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। इनकी व्यवस्था करने के लिए प्रशासन ने मिशन मुक्ति अभियान चलाया था। हालांकि उस दौरान भिखारियों को सड़कों से हटाकर पुनवांस के दावे किए गए थे लेकिन अब स्थिति जस की तस हो गई है।

ताज्जुब की बात कि ब्रिक्स के मद्देनजर शहर में विदेशी मेहमान आए हुए हैं, ऐसे में चौक-चौराहों पर भिखारियों के जमावड़े के चलते शहर की छवि धूमिल हो रही है। इसके बावजूद प्रशासन भिखारियों को सड़कों से हटाने में अनेदखी कर रहा है।

सुबह से देर रात तक सक्रिय रहने वाले भिखारी राहगीरों और वाहन चालकों से लगातार भीख मांगते नजर आते हैं। कई स्थानों पर वाहन रुकते ही बच्चों और महिलाओं के समूह गाड़ियों के पास पहुंच जाते हैं, जिससे यातायात भी प्रभावित होता है।

भिखारियों के अचानक सामने आ जाने के कारण कई बार सड़क हादसों का भी खतरा बढ़ जाता है। इससे कई बार भिखारियों के साथ वाहन चालकों की जान को भी खतरा रहता है। लोगों ने मांग की है कि इन भिखारियों की पुख्ता व्यवस्था की जाए।

मिशन मुक्ति में आई सुस्ती

सिटी को भिक्षेकरीमुक्त और बालस्नेही शहर बनाने के उद्देश्य से विगत दिनों 'मिशन मुक्ति फेज 3' अभियान शुरू किया गया था।

पुलिस, मनपा, महिला एवं बाल विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त समन्वय से बड़े स्तर पर रेस्क्यू, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास कार्य के दावे किए गए थे।

शुरुआती दिनों में कार्रवाई भी हुई, लेकिन उसकी निरंतरता नहीं रहने से स्थिति फिर पहले जैसी हो गई है। अब मिशन मुक्ति में सुस्ती आ गई है। पूरा अभियान ठंडे बस्ते में दिख रहा है। एक बार फिर चौक-चौराहों पर भिखारियों का जमघट देखा जा सकता है।

यातायात व्यवस्था पर भी पड़ रहा असर

शहरवासियों का भी मानना है कि प्रशासन को अभियान को फिर से सक्रिय कर नियमित निगरानी करनी चाहिए, ताकि नागपुर को वास्तव में भिक्षावृत्ति मुक्त और बालस्नेही शहर बनाने का लक्ष्य पूरा किया जा सके।

लोगों का कहना है कि प्रमुख चौराहों पर भिखारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें हटाने या पुनर्वास की दिशा में प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। इससे शहर की यातायात व्यवस्था के साथ-साथ सार्वजनिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

बच्चे लादकर लोगों को करते ब्लैकमेल

शहर में भीख मांगने के तौर-तरीकों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। कुछ लोग छोटे बच्चों को गोद में लेकर दया की अपील करते हैं, तो कुछ स्वयं को दिव्यांग या गंभीर बीमारी से पीड़ित बताकर लोगों से पैसे मांगते हैं। कई मामलों में वाहन चालकों का पीछा करने और बार-बार पैसे मांगने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जिससे नागरिक असहज महसूस कर रहे हैं।

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